पटना में गंगा खतरे के निशान से ऊपर, बगहा में गंडक का कटाव तेज
- बेगूसराय के गंगा घाट पर श्मशान में घुसा पानी, नाव से शव और जलावन ले जाने को मजबूर लोग
- 19 जिलों में बारिश की संभावना, अगले 24 घंटे में उत्तर-पूर्वी बिहार के जिलों में तेज बारिश के आसार
पटना। राजधानी सहित बिहार के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ और कटाव की चिंता गहराने लगी है। राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जबकि पश्चिम चंपारण के बगहा क्षेत्र में गंडक नदी के तेज कटाव से लोगों के घर और खेत नदी में समा रहे हैं। वहीं, बेगूसराय में गंगा का पानी श्मशान घाट तक पहुंच जाने के कारण अंतिम संस्कार करना भी मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर, मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के 19 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। हालांकि, प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर बनी हुई हैं और अब तक सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पटना में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। यहां खतरे का निशान 48.60 मीटर निर्धारित है। गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से नदी किनारे बसे इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। दीघा क्षेत्र में भी गंगा के जलस्तर पर निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि पानी बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों पर असर पड़ सकता है। उधर, बक्सर में भी गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। शुक्रवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 58.92 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 60.32 मीटर है, जबकि चेतावनी स्तर 59.32 मीटर निर्धारित है। नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से मात्र 40 सेंटीमीटर नीचे बताया जा रहा है। पिछले कई घंटों से गंगा के जलस्तर में प्रति घंटे करीब दो सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की जा रही है। ऐसे में यदि जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहा तो आने वाले दिनों में बक्सर में भी स्थिति चिंताजनक हो सकती है। बेगूसराय के तेघड़ा प्रखंड स्थित अयोध्या गंगा घाट पर गंगा का बढ़ता पानी लोगों के लिए नई परेशानी बन गया है। नदी का पानी बढ़ने के कारण श्मशान क्षेत्र के आसपास जलभराव हो गया है। अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को शव और जलावन की लकड़ी नाव पर रखकर श्मशान तक जाना पड़ रहा है। पानी भर जाने के कारण अंतिम संस्कार की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हो गई है और शोकाकुल परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम चंपारण के बगहा क्षेत्र में गंडक नदी का कटाव लगातार तेज हो रहा है। बगहा के मधुबनी प्रखंड की चिउरही पंचायत में नदी ने कई घरों और खेतों को अपनी चपेट में ले लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई परिवार लंबे समय से इस इलाके में रह रहे थे, लेकिन नदी के कटाव ने उनके आशियानों को उजाड़ दिया। कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि नदी अब पैक्स गोदाम के करीब पहुंच गई है। इससे आसपास के लोगों में भय का माहौल है। कटाव की चपेट में एक सरकारी विद्यालय का पूरा भवन भी नदी में समा चुका है। खेतों और आवासीय इलाकों को नुकसान पहुंचने के बाद ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। लगातार कटाव के कारण कई परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती खड़ी हो गई है। स्थानीय लोग प्रशासन से कटाव रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। इस बीच, बिहार में मौसम की स्थिति भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। मौसम विभाग ने राज्य के 19 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। पटना समेत राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य रहने के आसार हैं, हालांकि कई क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। इस दौरान करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे के दौरान उत्तर-पूर्वी बिहार के कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है। सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में तेज बारिश की संभावना को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। अगले 48 घंटों के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है और लोगों को गर्मी के साथ उमस का सामना करना पड़ सकता है। बीते 24 घंटों के दौरान पटना का अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि 36.2 डिग्री सेल्सियस के साथ पश्चिमी चंपारण राज्य का सबसे गर्म जिला रहा। मानसून के इस मौसम में अब तक बिहार में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे कृषि और जल संसाधनों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बना निम्न दबाव का क्षेत्र तथा अमृतसर, नजीबाबाद और हरदोई होते हुए बंगाल की खाड़ी तक फैली मानसून द्रोणी का असर बिहार के मौसम पर पड़ रहा है। इनके प्रभाव से बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है, लेकिन फिलहाल पूरे राज्य में व्यापक और भारी बारिश की स्थिति बनने के संकेत नहीं हैं। एक तरफ सामान्य से कम बारिश और दूसरी तरफ गंगा व गंडक जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बिहार के कई इलाकों में अलग-अलग तरह की चुनौतियां पैदा कर दी हैं। प्रशासन के सामने अब नदी किनारे के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, कटाव प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी है।


