August 13, 2026

बिहार में 20 मई को दवा दुकानों की हड़ताल, मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी

  • ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट संगठनों का बंद का ऐलान
  • गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को पहले से दवाइयां खरीदने की सलाह

पटना। बिहार के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य में 20 मई को दवा दुकानों की हड़ताल होने जा रही है, जिससे दवाइयों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन तथा पटना केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने देशव्यापी बंद का समर्थन किया है। इसके चलते बिहार के कई जिलों में दवा दुकानों के बंद रहने की संभावना है। दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते कारोबार से पारंपरिक मेडिकल स्टोर को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनका आरोप है कि नई नीतियों और इंटरनेट आधारित दवा कंपनियों के विस्तार के कारण छोटे दुकानदारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। इसी के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार 19 मई की रात से ही हड़ताल शुरू हो जाएगी और 20 मई को पूरे दिन दवा दुकानें बंद रहेंगी। इस दौरान थोक दवा बाजार से लेकर मोहल्लों की छोटी दवा दुकानों तक दवाइयों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। इससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दवा व्यापारियों ने बताया कि 16 मई से 19 मई तक वे काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 20 मई को पूर्ण बंद रखा जाएगा। यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो भविष्य में आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जा सकता है। व्यापारियों का कहना है कि यह केवल व्यापार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से भी संबंधित है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन माध्यम से दवाइयों की बिक्री में कई बार नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता। इससे नकली या गलत दवाइयां मरीजों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि मेडिकल स्टोर पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट मरीजों को सही दवा और सही सलाह देते हैं, जबकि ऑनलाइन खरीद में यह सुविधा नहीं मिलती। उनका मानना है कि बिना उचित निगरानी के ऑनलाइन दवा बिक्री स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है। इस हड़ताल का सबसे अधिक असर उन मरीजों पर पड़ सकता है जो रोजाना दवाइयों पर निर्भर रहते हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, अस्थमा और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बुजुर्ग मरीजों और अस्पतालों में इलाज करा रहे लोगों के लिए भी यह चिंता का विषय बना हुआ है। दवा कारोबारियों ने लोगों से अपील की है कि वे 20 मई से पहले अपनी जरूरत की दवाइयां खरीदकर रख लें, ताकि बंद के दिन किसी प्रकार की कठिनाई न हो। कई मेडिकल दुकानदारों ने कहा है कि मरीजों को कम से कम कुछ दिनों की अतिरिक्त दवाइयां पहले से रखनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दवा जैसी आवश्यक सेवाओं में बाधा आने से आम लोगों को सीधी परेशानी होती है। इसलिए सरकार और व्यापारियों के बीच समय रहते बातचीत के जरिए समाधान निकालना जरूरी है। इधर आम लोगों में भी हड़ताल को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई मरीज और उनके परिजन पहले से दवाइयां खरीदने के लिए मेडिकल दुकानों पर पहुंच रहे हैं। कुछ स्थानों पर दवा दुकानों में भीड़ भी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच पारंपरिक व्यापार और नई तकनीक के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। ऑनलाइन सेवाओं को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन उनके लिए सख्त नियम और निगरानी जरूरी है ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल राज्यभर में दवा दुकानदार अपने आंदोलन की तैयारी में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर मरीजों और उनके परिवारों की नजर सरकार और व्यापारियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि समय रहते कोई समाधान नहीं निकलता, तो 20 मई को राज्य के कई हिस्सों में दवा संकट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

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