बिहार में बदला मौसम का मिजाज, आंधी-बारिश के बीच वज्रपात से दो की मौत

  • बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, कटिहार और जमुई में तेज बारिश से मिली राहत, कई जिलों में जारी हुआ सतर्कता अलर्ट
  • मौसम विभाग ने 12 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और 15 जिलों के लिए येलो अलर्ट की घोषणा, अगले एक-दो सप्ताह में मानसून के प्रवेश की संभावना

पटना। बिहार में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को शनिवार को मौसम ने कुछ राहत दी। राज्य के कई जिलों में अचानक मौसम का मिजाज बदल गया और तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, कटिहार और जमुई सहित कई जिलों में हुई वर्षा से तापमान में गिरावट दर्ज की गई, वहीं वज्रपात की घटनाओं ने चिंता भी बढ़ा दी। जमुई और मुंगेर में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए विशेष सतर्कता जारी करते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग के अनुसार बिहार के विभिन्न हिस्सों में वातावरण में नमी बढ़ने और स्थानीय स्तर पर बने निम्न दबाव के प्रभाव से मौसम में यह बदलाव देखा गया है। इसके कारण कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में वज्रपात की घटनाएं भी सामने आईं। जमुई जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र के कोनन इलाके में शुक्रवार देर रात आकाशीय बिजली गिरने से 47 वर्षीय महेंद्र यादव की मौत हो गई। बताया जाता है कि अचानक मौसम खराब होने के दौरान वे वज्रपात की चपेट में आ गए। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और ग्रामीणों में भी दुख व्याप्त है। इसी प्रकार मुंगेर जिले के लड़ैयाटांड़ थाना क्षेत्र के जतकुटिया गांव में शनिवार सुबह खेत में काम कर रहे 50 वर्षीय किसान गणेश यादव की वज्रपात से मौत हो गई। परिजनों के अनुसार गणेश यादव खेत में कृषि कार्य कर रहे थे। इसी दौरान अचानक बारिश शुरू हुई और तेज गर्जना के साथ बिजली गिर गई। वज्रपात की चपेट में आने से उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है और परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। राज्य में मौसम के इस बदलाव के बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की है। विभाग ने 12 जिलों में नारंगी चेतावनी और 15 जिलों में पीली चेतावनी घोषित की है। इन क्षेत्रों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना जताई गई है। लोगों से खुले स्थानों पर न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। हालांकि राजधानी पटना और दक्षिण बिहार के कुछ जिलों में लोगों को अभी गर्मी से पूरी तरह राहत मिलने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार पटना सहित दक्षिण बिहार के 11 जिलों में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की संभावना है। राजधानी में अधिकतम तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। खगड़िया जिले में भी मौसम ने अचानक करवट ली। पहले आसमान में घने काले बादल छाए और उसके बाद तेज वर्षा शुरू हो गई। बारिश के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने पहले ही यहां वर्षा की संभावना जताई थी, जो सही साबित हुई। खगड़िया के अलौली प्रखंड अंतर्गत बहादुरपुर पंचायत के लक्ष्मीपुर गांव में एक खजूर के पेड़ पर आकाशीय बिजली गिर गई। बिजली गिरने के बाद पेड़ में आग लग गई। हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया। उधर मुंगेर जिले में हुई तेज बारिश के कारण जमालपुर रेल कारखाना परिसर की कई इकाइयों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। पानी भर जाने से कर्मचारियों को कार्य करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर आवाजाही भी प्रभावित हुई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मानसून पूर्व गतिविधियों का परिणाम है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में प्रवेश कर लिया है और अब धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ रहा है। यदि मानसून की प्रगति सामान्य बनी रही तो अगले एक से दो सप्ताह के भीतर बिहार में भी मानसून का आगमन हो सकता है। सामान्यतः बिहार में मानसून जून के दूसरे पखवाड़े में सक्रिय होता है। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में आंधी और बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। हालांकि कुछ जिलों में उमस और गर्मी का प्रभाव बना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ वर्षा की तीव्रता और क्षेत्रीय विस्तार दोनों में वृद्धि होगी। फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, खराब मौसम के दौरान पेड़ों और खुले मैदानों से दूर रहने तथा वज्रपात की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है। राज्य में मौसम के इस बदले हुए स्वरूप ने जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं प्राकृतिक आपदाओं को लेकर सावधानी की आवश्यकता भी बढ़ा दी है।

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