October 23, 2026

बांकीपुर उपचुनाव को ‘फिक्स मैच’ की तरह खेल रहे हैं क्या तेजस्वी यादव? राजद के कोर वोटर पीके की ओर मुखातिब! लगेगा झटका पूरा..

पटना।बांकीपुर उप चुनाव को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम हो गई है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बांकीपुर उपचुनाव के ‘पॉलिटिकल मैच’ को एक ‘फिक्स मैच’ की तरह खेल रहे हैं.पिछले 10 दिनों से तेजस्वी यादव के अनुपस्थिति में उनकी पार्टी तथा उनकी पार्टी के प्रत्याशी अकेले चुनाव लड़ रही है.तेजस्वी यूरोप में है. इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. बिहार की राजनीति का केंद्र बने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार चुनावी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। दूसरी ओर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की चुनावी सक्रियता को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजद इस उपचुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ रहा होता, तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव स्वयं चुनाव प्रचार में अधिक सक्रिय दिखाई देते। उनकी अनुपस्थिति और सीमित चुनावी गतिविधियों को लेकर विरोधी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। राजद प्रत्याशी मुख्य रूप से कुछ स्थानीय राजद और कांग्रेस नेताओं के सहारे चुनाव प्रचार करती नजर आ रही हैं।

उधर, जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से चुनाव पूरी तरह त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गया है। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि राजद के पारंपरिक या कोर वोट बैंक का एक हिस्सा प्रशांत किशोर की ओर मुखातिब हो चुका है। यदि मतदान के दिन यह रुझान वोटों में तब्दील होता है, तो इसका सीधा असर राजद के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

बांकीपुर का परिणाम केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की भविष्य की राजनीति के संकेतक के रूप में भी देखा जा रहा है। यदि राजद अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाता, तो बिहार में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उसकी राजनीतिक स्थिति और रणनीति पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं, यदि जन सुराज उल्लेखनीय वोट हासिल करता है, तो राज्य की विपक्षी राजनीति के समीकरणों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि यह भी माना जा रहा है कि यदि तेजस्वी यादव समय रहते अपने सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर व्यापक चुनाव अभियान चलाते, तो मुकाबला और अधिक रोचक तथा परिणाम अप्रत्याशित हो सकते थे। फिलहाल बांकीपुर उपचुनाव में एनडीए, राजद और जन सुराज के बीच त्रिकोणीय संघर्ष ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। अंतिम फैसला अब मतदाताओं के हाथ में है, और चुनाव परिणाम ही बताएंगे कि किस दल की रणनीति सबसे प्रभावी साबित हुई।

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