कर्नाटक में सरकारी कर्मचारियों के लिए समयपालन अनिवार्य, ‘कर्तव्य’ अनुप्रयोग से होगी उपस्थिति की निगरानी

  • सुबह 10 बजे तक कार्यालय पहुंचना होगा अनिवार्य, विलंब करने वालों पर होगी कार्रवाई
  • एआई आधारित प्रणाली तैयार करेगी अनुपस्थित और विलंब से आने वाले कर्मचारियों की रिपोर्ट

बेंगलुरु। सरकारी कार्यालयों में समयपालन, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में कर्नाटक सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सुबह 10 बजे तक कार्यालय पहुंचना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही प्रत्येक कर्मचारी को ‘कर्तव्य’ नामक मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नए नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में 4 जून को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों के देर से पहुंचने, अनियमित उपस्थिति और कार्य निष्पादन में कमी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश ने विस्तृत आदेश जारी कर सभी विभागों को नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया। जारी आदेश के अनुसार अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर से लेकर जिला स्तर तक कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिदिन कार्यालय पहुंचने के बाद ‘कर्तव्य’ अनुप्रयोग पर उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसी प्रकार कार्यालय से निकलते समय भी उन्हें अपनी उपस्थिति समाप्ति का विवरण दर्ज करना होगा। इस प्रक्रिया को ‘प्रवेश पंजीकरण’ और ‘निर्गमन पंजीकरण’ प्रणाली के रूप में लागू किया गया है। सरकार ने इस व्यवस्था को केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। राज्य के ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एक उन्नत निगरानी प्रणाली विकसित की गई है। यह प्रणाली स्वतः उन कर्मचारियों की पहचान करेगी जिन्होंने निर्धारित समय तक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं की है। नई तकनीक के माध्यम से जिला स्तर और कार्यालय स्तर पर अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट में यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन कर्मचारी सुबह 10 बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचे। यह जानकारी स्वतः संबंधित विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी जाएगी, जिससे वे आवश्यक कार्रवाई कर सकें। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्य संस्कृति में सुधार लाना है। लंबे समय से आम नागरिकों द्वारा शिकायत की जाती रही है कि कई सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होते, जिससे जनता को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कार्यालयों में अनुशासन बढ़ेगा और नागरिकों को समय पर सेवाएं मिल सकेंगी। सरकार ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया है जो क्षेत्रीय निरीक्षण, सरकारी दौरे या अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए कार्यालय से बाहर रहते हैं। ऐसे कर्मियों को ‘कार्यालय से बाहर ड्यूटी’ विकल्प का चयन करना होगा। इसके बाद उनकी उपस्थिति का सत्यापन संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी द्वारा किया जाएगा। इससे वास्तविक सरकारी कार्यों में लगे कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी। विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रतिदिन ‘कर्तव्य’ नियंत्रण पटल के माध्यम से उपस्थिति रिपोर्ट की समीक्षा करें। यदि कोई कर्मचारी बार-बार विलंब से आता है या उपस्थिति दर्ज करने में लापरवाही बरतता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समयपालन को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे उपस्थिति से जुड़े विवादों में कमी आएगी तथा कार्य संस्कृति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को वास्तविक समय में कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी मिलती रहेगी। गौरतलब है कि ‘कर्तव्य’ अनुप्रयोग का उपयोग पहले भी राज्य के कुछ विभागों में किया जा रहा था, जहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। अब सरकार ने इसके दायरे का विस्तार करते हुए इसे पूरे राज्य के सभी विभागों में अनिवार्य बना दिया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पिछले कुछ समय से सरकारी मशीनरी को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। नई उपस्थिति प्रणाली को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि इस व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों में अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि आम जनता को भी सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा। राज्य सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसकी सफलता और प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि यह व्यवस्था अपेक्षित परिणाम देती है, तो अन्य राज्यों के लिए भी यह एक आदर्श मॉडल बन सकती है। फिलहाल सभी विभागों को नए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और समयपालन की संस्कृति को मजबूत बनाने का दायित्व सौंपा गया है।

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