5 वर्षों में 500 से अधिक फिर लेकिन राजीव नगर में नहीं रुके अवैध निर्माण.. एफआईआर के आगे की कार्रवाई शून्य.. थानेदार-आईओ सभी जिम्मेदार..
पटना।राजधानी पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र के बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिग्रहित भूखंड पर 2022 के बाद अब तक बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुए हैं.खास बात तो यह है कि जिन भूखंडों पर आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता के द्वारा अवैध निर्माण का एफआईआर दर्ज कराया गया.पुलिस की लापरवाही या कहिए कि पुलिस की मिली भगत से उन भूखंडों पर भी बेरोक-टोक मकान बनाकर तैयार हो गए. आवास बोर्ड के पदाधिकारियों के द्वारा 2020 से लेकर 2026 तक अधिग्रहित भूखंडों पर अवैध निर्माण के शिकायत की तकरीबन 500 से अधिक एफआईआर दर्ज करवाए गए. लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस बस एक दो बार छापेमारी करके ही मामले की इति श्री कर देती है.कुछ मामलों में ‘प्री एश्योर्ड डील’ नहीं होने के कारण गिरफ्तारी भी की जाती है.लेकिन अधिकांश मामलों में एफआईआर के बाद भी पुलिस ने कुछ नहीं किया.जिसके वजह से भूखंडों पर अवैध बिल्डिंग के बनकर खड़ी हो गई.बड़ी संख्या में राजीव नगर थाना तथा दीघा थाना में अवैध निर्माण की एफआईआर पेंडिंग है. अधिसंख्य मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद नियुक्त अनुसंधान पदाधिकारी से कभी इस केस को लेकर वरीय अधिकारियों ने पूछा तक की इन मामलों में क्या अग्रतर कार्रवाई की गई? इतना ही नहीं कई मामलों में पर्यवेक्षण के दौरान एसडीपीओ’ डीएसपी स्तर के अधिकारियों के द्वारा अतिक्रमण वाद चलाने का निर्देश जारी किया गया.लेकिन वे पर्यवेक्षण टिप्पणियां भी ‘कोल्ड स्टोरेज’ में डाल दिए गए. 2022 में बड़े संख्या में पटना डीएम के आदेश पर राजीव नगर में बुलडोजर चले थे.तो कई मकानों को तोड़ दिया गया था.बाद में हाईकोर्ट के तत्कालीन आदेश के बाद विध्वंसक कार्रवाई को ब्रेक लगा.मगर इसके बावजूद प्रशासन इस मामले में सचेत नहीं हुई. स्थानीय पुलिस प्रशासन यह समझने को तैयार नहीं है कि अवैध निर्माण को ध्वस्त करने से ज्यादा जरूरी अवैध निर्माण को रोकना है.आज राजीव नगर में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण जारी है.आज प्रशासन रोकने का काम नहीं कर रही है.लेकिन कल को प्रशासन इसी अवैध निर्माण को,जब यह पूरी तरह से घर- आशियाना का रूप -आकार ले चुका रहेगा,तब इसे तोड़ने के लिए आएगी.उस वक्त प्रशासन का रुख निश्चित तौर पर कठघरे में खड़ा करने लायक होगा. क्योंकि अभी जब बड़ी संख्या में निर्माण जारी है.तब एफआईआर के बावजूद राजीव नगर थाना की पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है.ऐसी स्थिति में जब वे निर्माण बनकर तैयार हो जाएंगे और उसमें लोग रहने लगेंगे तब उसे किसी भी परिस्थिति में प्रशासन के द्वारा तोड़ने का प्रयास करना न्याय संगत नहीं रहेगा. क्योंकि आज जो प्रशासन अवैध निर्माण को रोक नहीं रही है.कल उसे किसी प्रकार का हक नहीं बनता कि वह बने बनाए मकान तथा उसमें रहने वाले लोगों को विध्वंस करके बेघर कर दे.आवास बोर्ड के अधिकारी इस सच्चाई से भली’भांति परिचित है. लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है.राजीव नगर तथा दीघा थाना में अवैध निर्माण के जितने एफआईआर आवास बोर्ड के द्वारा दर्ज कराया गया है.आवास बोर्ड के अधिकारी भी बस मामला दर्ज करने के बाद इसकी सुधि तक लेना उचित नहीं समझते हैं.इसी कारण से बड़ी संख्या में भूमि माफिया अवैध निर्माण के कार्य को अंजाम देने में सफल रहे हैं. राजीव नगर थाना की भूमिका अवैध निर्माण को लेकर सबसे अधिक गैर जिम्मेदाराना तथा संशय के घेरे में रहा है.


