कोचिंग विवाद मामले में खान सर समेत पांच आरोपियों को जमानत, हथियारों की वैधता पर जांच जारी

  • पटना सिविल न्यायालय ने खान सर और तीन सहयोगियों सहित दोनों अंगरक्षकों की जमानत याचिका मंजूर की
  • पुलिस की अद्यतन केस डायरी में हथियार लाइसेंस, अनुमति और सत्यापन से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख

पटना। चर्चित कोचिंग विवाद मामले में पटना सिविल न्यायालय ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए फैजल खान उर्फ खान सर, उनके तीन सहयोगियों तथा फायरिंग के आरोप में जेल में बंद दोनों अंगरक्षकों प्रदीप कुमार और तालेबर सिंह की जमानत याचिका मंजूर कर ली। इस फैसले के साथ ही मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि न्यायालय से जमानत मिलने के बावजूद मामले की जांच जारी रहेगी और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा गया था फैसला
इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पहले फैजल खान की आपराधिक पृष्ठभूमि से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। सुनवाई के क्रम में विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने 10 जुलाई को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने सभी संबंधित आरोपियों की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर लीं। इस आदेश के बाद मामले से जुड़े सभी पक्षों की नजर अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
बचाव पक्ष और शिकायतकर्ता पक्ष ने रखे अपने-अपने तर्क
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने न्यायालय को बताया कि पुलिस द्वारा मामले की अंतिम रिपोर्ट पहले ही तैयार की जा चुकी थी। इसी कारण संबंधित विवरण का उल्लेख अलग से नहीं किया गया। दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की ओर से आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी पूरी तरह प्रस्तुत नहीं की गई है। इसी आधार पर न्यायालय ने संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने जमानत देने का निर्णय सुनाया।
हथियारों के सत्यापन में सामने आए नए तथ्य
इस पूरे मामले की जांच के दौरान पटना पुलिस ने दोनों अंगरक्षकों के हथियारों और उनके लाइसेंस का विस्तृत सत्यापन किया। पुलिस के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिन्हें अद्यतन केस डायरी में शामिल किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन तथ्यों की आगे भी कानूनी जांच जारी रहेगी और आवश्यक होने पर संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
तालेबर सिंह के हथियार को लेकर उठे सवाल
पुलिस जांच के अनुसार फायरिंग में जिस हथियार के इस्तेमाल का आरोप है, वह तालेबर सिंह के नाम पर पंजीकृत बताया गया है। जांच में यह बात सामने आई कि उनके हथियार का लाइसेंस पूरे देश में मान्य नहीं था। पुलिस का आरोप है कि उत्तर प्रदेश से बिहार में हथियार लेकर आने और यहां सुरक्षा ड्यूटी करने के लिए आवश्यक वैध अनुमति उनके पास उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद वे बिहार में अंगरक्षक के रूप में कार्य कर रहे थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस संबंध में स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जो जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
स्थानीय अनुमति नहीं लेने का आरोप
पुलिस के अनुसार बिहार में हथियार के साथ सुरक्षा संबंधी कार्य करने से पहले स्थानीय प्रशासन, शस्त्र मजिस्ट्रेट अथवा संबंधित थाना को सूचना देना आवश्यक होता है। जांच में यह आरोप भी सामने आया कि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पुलिस का कहना है कि बिना निर्धारित अनुमति के हथियार के साथ कार्य करना कानून के दायरे में जांच का विषय है। इन तथ्यों को भी अद्यतन केस डायरी का हिस्सा बनाया गया है।
दूसरे अंगरक्षक के लाइसेंस की भी हुई जांच
पुलिस ने दूसरे अंगरक्षक प्रदीप कुमार के हथियार की भी जांच की। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि उनके हथियार का लाइसेंस पूरे देश में मान्य था, लेकिन यह लाइसेंस उनके पिता की हत्या के बाद आत्मरक्षा के उद्देश्य से प्रदान किया गया था। पुलिस का आरोप है कि इस हथियार का उपयोग निजी सुरक्षा सेवा में किया गया, जिसकी वैधानिक स्थिति की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस पहलू को भी केस डायरी में दर्ज किया गया है और आगे की जांच में इसकी विधिक समीक्षा की जाएगी।
नियुक्ति प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों ने यह भी उल्लेख किया है कि अंगरक्षकों की नियुक्ति के दौरान पुलिस सत्यापन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले में दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की गहन जांच जारी है।
जमानत से जांच पर नहीं पड़ेगा असर
कानूनी जानकारों का कहना है कि न्यायालय द्वारा जमानत दिया जाना किसी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय नहीं होता। जमानत केवल न्यायिक प्रक्रिया के दौरान राहत का एक कानूनी प्रावधान है। मामले की जांच पहले की तरह जारी रहेगी और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी। वहीं अंतिम निर्णय न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा। फिलहाल पटना सिविल न्यायालय के आदेश के बाद खान सर, उनके सहयोगियों और दोनों अंगरक्षकों को जमानत मिल गई है, जबकि पुलिस हथियारों की वैधता, अनुमति, नियुक्ति प्रक्रिया और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में जांच और न्यायिक कार्रवाई के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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