August 20, 2026

पटना में बढ़ने लगा डेंगू का प्रकोप, 24 घंटे में मिले 10 नए मरीज

  • अगस्त में अब तक 61 संक्रमित मिले, बारिश के बाद जमा पानी बना एडीज मच्छरों के पनपने का अनुकूल ठिकाना
  • प्रभावित इलाकों में धुआं छिड़काव और लार्वा नाशक दवा के इस्तेमाल का दावा, मरीजों ने जमीनी स्तर पर लापरवाही के लगाए आरोप

पटना। राजधानी पटना में डेंगू का प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटे के दौरान शहर में डेंगू के 10 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अगस्त महीने में अब तक संक्रमितों की संख्या 61 तक पहुंच गई है। इससे पहले जुलाई में डेंगू के कुल 26 मरीज मिले थे। लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जमा हो रहा पानी डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। ये मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में भी तेजी से पनप सकते हैं। ऐसे में घरों और आसपास के क्षेत्रों में जमा पानी को समय-समय पर हटाना जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को कूलर, गमले, बाल्टी, छत पर पड़े पुराने बर्तन, बेकार टायर और छोटे गड्ढों में जमा पानी की नियमित सफाई करने की सलाह दी है। बारिश के बाद यदि इन स्थानों पर कई दिनों तक पानी जमा रहता है तो मच्छरों के लार्वा पनप सकते हैं। इसलिए घर के साथ-साथ आसपास के खाली प्लॉट और सार्वजनिक स्थानों की सफाई भी जरूरी बताई जा रही है। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि नगर निगम के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से मच्छर नियंत्रण के लिए धुआं छिड़काव कराया जा रहा है। इसके अलावा डेंगू संक्रमित व्यक्ति के घर और आसपास के क्षेत्रों में मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने वाली दवा का सघन छिड़काव करने की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संक्रमण फैलने से रोकने के लिए प्रभावित इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। हालांकि, जमीनी स्तर पर मच्छर नियंत्रण अभियान को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कंकड़बाग इलाके के एक डेंगू पीड़ित ने बताया कि उनके क्षेत्र में लार्वा नाशक दवा का छिड़काव करने के लिए कोई टीम नहीं पहुंची। वहीं कुर्जी बालूपर के संक्रमित रोहित राज ने बताया कि उनके घर के आसपास दो अन्य लोग भी डेंगू से संक्रमित हैं, लेकिन वहां न तो मच्छरों को नियंत्रित करने वाली टीम पहुंची और न ही नियमित धुआं छिड़काव किया जा रहा है स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल जागरूकता अभियान, बैनर और पोस्टर लगाने से डेंगू की रोकथाम संभव नहीं है। प्रभावित इलाकों में नियमित सफाई, जमा पानी को हटाने और मच्छरों के लार्वा नष्ट करने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है। लोगों ने लार्वा नाशक दवा के छिड़काव और धुआं छिड़काव में कथित लापरवाही की जवाबदेही तय करने की मांग की है। डेंगू के मामलों में वृद्धि के साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है। डेंगू के प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन, मतली, अत्यधिक कमजोरी तथा त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और आवश्यक जांच करानी चाहिए। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना जरूरी है। बिना चिकित्सक की सलाह के किसी भी प्रकार की दवा लेने से बचना चाहिए डेंगू की स्थिति में कुछ दर्द निवारक दवाओं का सेवन खतरनाक हो सकता है। विशेष रूप से एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बुखार या अन्य लक्षणों की स्थिति में चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही उपचार कराया जाए। बारिश का दौर जारी रहने के कारण आने वाले दिनों में डेंगू का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के लिए मच्छर नियंत्रण अभियान को प्रभावी बनाना बड़ी चुनौती है। वहीं आम लोगों की भागीदारी भी डेंगू की रोकथाम में महत्वपूर्ण है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने देना, कूलर और पानी रखने वाले बर्तनों की नियमित सफाई करना तथा बीमारी के लक्षण दिखते ही समय पर जांच कराना डेंगू से बचाव के लिए जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आम लोगों को भी सतर्क रहना होगा, तभी राजधानी में बढ़ते डेंगू संक्रमण पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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