August 21, 2026

नई सरकार में नीतीश की योजनाओं पर उठे सवाल, कौशल प्रशिक्षण से स्टूडेंट ऋण तक बढ़ीं मुश्किलें

  • कुशल युवा कार्यक्रम के संचालक सड़क पर उतरे, आठ महीने से स्वयं सहायता भत्ता नहीं मिलने का दावा
  • स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि चार लाख से घटाकर दो लाख करने की चर्चा, लाखों युवाओं की योजनाओं के भविष्य पर नजर

पटना। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में शुरू की गई युवा और स्टूडेंट केंद्रित योजनाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कौशल प्रशिक्षण, बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहायता और उच्च शिक्षा के लिए ऋण उपलब्ध कराने वाली इन योजनाओं के संचालन और भुगतान में परेशानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह चर्चा तेज है कि नई सरकार इन योजनाओं को पुराने स्वरूप में जारी रखेगी या इनमें बदलाव किया जाएगा। नीतीश कुमार ने वर्ष 2015 में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम शुरू किया था। इसके पहले निश्चय ‘आर्थिक हल, युवाओं को बल’ के तहत युवाओं के लिए तीन प्रमुख योजनाओं को आगे बढ़ाया गया। इनमें कुशल युवा कार्यक्रम, मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना और बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना शामिल हैं। इनका उद्देश्य युवाओं को कौशल, आर्थिक सहायता और उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना था।
कुशल युवा कार्यक्रम के संचालन पर संकट
कुशल युवा कार्यक्रम के तहत युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी, संवाद कौशल और व्यवहार कौशल जैसे प्रशिक्षण शामिल हैं। राज्य में बड़ी संख्या में प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की कोशिश की गई। अब कार्यक्रम से जुड़े केंद्र संचालकों की ओर से विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर आवाज उठाई जा रही है। गुरुवार को पटना में संचालकों ने प्रदर्शन भी किया। इससे योजना के संचालन और भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रों का कामकाज प्रभावित होने की स्थिति में इसका सीधा असर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे या प्रशिक्षण लेने की तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ सकता है।
स्वयं सहायता भत्ते के भुगतान में देरी का दावा
मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना भी युवाओं से जुड़ी प्रमुख योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र बेरोजगार युवाओं को नौकरी तलाशने के दौरान अधिकतम 24 महीने तक प्रति माह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। अब दावा किया जा रहा है कि लाभार्थियों को करीब आठ महीने से भत्ते का भुगतान नहीं मिला है। हालांकि भुगतान में देरी को लेकर सरकार की ओर से इस जानकारी में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यदि भुगतान लंबे समय तक लंबित रहता है तो इसका सबसे अधिक असर उन बेरोजगार युवाओं पर पड़ेगा, जिनके लिए यह राशि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और रोजगार तलाशने के दौरान छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आर्थिक मदद है।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड में बदलाव की चर्चा
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को उच्च शिक्षा से जोड़कर शुरू किया गया था। इसके तहत पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए चार लाख रुपये तक शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह योजना उच्च और तकनीकी शिक्षा हासिल करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी। अब योजना के तहत अधिकतम राशि चार लाख रुपये से घटाकर दो लाख रुपये किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही स्वीकृत राशि के भुगतान में देरी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। हालांकि योजना में हुए बदलावों की वास्तविक स्थिति और उनके दायरे को सरकार के आधिकारिक आदेशों के आधार पर ही अंतिम माना जाएगा। यदि सहायता राशि में बड़ी कमी होती है तो इसका असर महंगी व्यावसायिक और तकनीकी पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों पर अधिक पड़ सकता है।
नए विभाग बने, पुरानी योजनाओं पर सवाल
नई सरकार ने उच्च शिक्षा तथा युवाओं से जुड़े मामलों के बेहतर संचालन के लिए उच्च शिक्षा विभाग और युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन किया है। नए विभाग बनने से उम्मीद की जा रही थी कि उच्च शिक्षा, रोजगार और कौशल प्रशिक्षण से संबंधित योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। दूसरी ओर, पुरानी योजनाओं के भुगतान और संचालन से जुड़ी शिकायतों ने नई सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। सरकार को यह तय करना होगा कि इन योजनाओं की मौजूदा समस्याओं को दूर कर इन्हें जारी रखा जाए या इनके स्वरूप में बदलाव किया जाए।
नई सरकार के फैसले पर युवाओं की नजर
‘आर्थिक हल, युवाओं को बल’ कार्यक्रम को नीतीश कुमार के युवा एजेंडे की प्रमुख पहल के रूप में पेश किया गया था। इसके जरिए शिक्षा से लेकर कौशल प्रशिक्षण और बेरोजगारी के दौरान आर्थिक सहायता तक युवाओं की अलग-अलग जरूरतों को जोड़ने का प्रयास किया गया। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के सामने इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से चलाने की चुनौती है। कुशल युवा कार्यक्रम के संचालन, स्वयं सहायता भत्ते के लंबित भुगतान और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड में संभावित बदलाव जैसे मुद्दों पर सरकार का स्पष्ट रुख सामने आने का इंतजार है। बिहार के लाखों स्टूडेंटों और युवाओं की नजर इस बात पर है कि नई सरकार पुरानी युवा योजनाओं को मजबूत करती है, उनमें सुधार करती है या उनके स्वरूप में कोई बड़ा बदलाव लाती है।

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