विधान परिषद चुनाव में चिराग का बड़ा दांव, अशरफ अंसारी पर जताया भरोसा
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अशरफ अंसारी के नाम को दी औपचारिक मंजूरी
- पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय की दावेदारी को झटका, एनडीए की राजनीति में बढ़ी हलचल
पटना। बिहार विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव 2026 को लेकर राज्य की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दलों के बीच उम्मीदवारों के चयन और सीटों के बंटवारे को लेकर लगातार मंथन जारी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री तथा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय लेते हुए पार्टी के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी के नाम पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी है। पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के बाद यह लगभग स्पष्ट माना जा रहा है कि विधान परिषद चुनाव के लिए पार्टी की पहली पसंद अब अशरफ अंसारी हैं। इस निर्णय ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। विशेष रूप से पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय के समर्थकों के लिए यह फैसला एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को एक सीट मिलती है, तो उस पर सबसे मजबूत दावेदारी हुलास पांडेय की होगी। लेकिन अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक योगदान और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को प्राथमिकता देते हुए अशरफ अंसारी के नाम को आगे बढ़ाया है। पार्टी की ओर से 6 जून 2026 को जारी प्रेस नोट में कहा गया कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने बिहार विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया। इसके बाद अशरफ अंसारी के नाम को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठन को मजबूत करने और सामाजिक आधार का विस्तार करने में अशरफ अंसारी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह फैसला केवल एक उम्मीदवार के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक रणनीति भी छिपी हुई है। बिहार की राजनीति में सामाजिक और सामुदायिक समीकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में अल्पसंख्यक समाज से आने वाले अशरफ अंसारी को आगे बढ़ाकर पार्टी एक व्यापक सामाजिक संदेश देने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह कदम संगठन विस्तार और नए मतदाता वर्गों तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा है। अशरफ अंसारी पिछले कई वर्षों से पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में संगठन विस्तार अभियान चलाया और कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम किया। पार्टी के भीतर उन्हें मेहनती, सक्रिय और संगठन के प्रति समर्पित नेता के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर हुलास पांडेय का नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं होने से उनके समर्थकों के बीच निराशा देखी जा रही है। हुलास पांडेय को पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। शाहाबाद क्षेत्र में उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है और वे पहले भी विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका अनुभव और जनाधार उन्हें मजबूत दावेदार बनाता था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस बार अलग रणनीति अपनाई है। विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर भी लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। विभिन्न दल अपने नेताओं को प्रतिनिधित्व दिलाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। ऐसे समय में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) द्वारा अशरफ अंसारी के नाम की घोषणा यह संकेत देती है कि पार्टी अब संगठन को मजबूत करने वाले चेहरों को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला चिराग पासवान की नेतृत्व शैली को भी दर्शाता है। वे केवल पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय संगठनात्मक कार्यों और भविष्य की रणनीतिक जरूरतों को महत्व दे रहे हैं। इससे पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं को भी यह संदेश गया है कि संगठन में सक्रिय योगदान देने वालों को उचित अवसर मिल सकता है। अब सभी की निगाहें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की अंतिम उम्मीदवार सूची और चुनावी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि गठबंधन के भीतर सीटों का अंतिम स्वरूप क्या होगा और चुनावी मुकाबले का स्वरूप किस दिशा में आगे बढ़ेगा। फिलहाल इतना तय है कि अशरफ अंसारी के नाम पर लगी मुहर ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। वहीं हुलास पांडेय के समर्थकों के बीच भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बिहार विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे राजनीतिक समीकरणों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का यह निर्णय राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।


