August 20, 2026

नीतीश कुमार के इस्तीफे की अटकलों से बिहार की सियासत गरमाई, नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज

  • 30 मार्च को विधान परिषद सदस्यता छोड़ सकते हैं मुख्यमंत्री, राज्यसभा सदस्य बनने के बाद बढ़ी हलचल
  • नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज, विभिन्न नामों पर सियासी चर्चाएं

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को विधानमंडल की उच्च सदन सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि वे इस दिन बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ सकते हैं, जिसके साथ ही उनके मुख्यमंत्री पद से हटने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संविधान के प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। ऐसे में उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी एक पद को छोड़ना अनिवार्य है। इसी कारण 30 मार्च की तारीख को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि 12 अप्रैल को नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ ले सकते हैं। इसके बाद 13 या 14 अप्रैल को उनके पटना लौटने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस बीच उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की चर्चाएं भी जोर पकड़ चुकी हैं, जिससे राज्य की राजनीति में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन काफी लंबा और विविध अनुभवों से भरा रहा है। उन्होंने वर्ष 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से पहली बार विधायक के रूप में जीत दर्ज की थी। इसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए और बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने। बाद में वे नालंदा से भी कई बार संसद सदस्य चुने गए। उन्होंने केंद्र सरकार में रेल मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वे वर्ष 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 2005 में उन्होंने पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उसके बाद से लंबे समय तक राज्य की राजनीति के केंद्र में बने रहे। उनके कार्यकाल को विकास और सुशासन के एजेंडे के लिए जाना जाता है। अब राज्यसभा के लिए उनके निर्वाचित होने के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। यदि वे इस्तीफा देते हैं, तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हो सकता है और नई राजनीतिक परिस्थितियां सामने आ सकती हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से हो सकता है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है और पार्टी के भीतर उनके नाम को लेकर चर्चा होने की बात कही जा रही है। वहीं विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के हालिया नागपुर दौरे को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय भी गए थे, जिससे सियासी गतिविधियों को लेकर नई अटकलें तेज हो गई हैं। इसके साथ ही जनता दल यूनाइटेड के कुछ नेताओं द्वारा नीतीश कुमार के पुत्र निशांत को राजनीति में सक्रिय भूमिका देने और उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी सामने आ रही है। हाल के दिनों में निशांत के राजनीतिक रूप से सक्रिय होने को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं। हालांकि, इन सभी अटकलों के बीच अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।फिलहाल, सभी की नजरें 30 मार्च पर टिकी हुई हैं, जब यह स्पष्ट हो सकेगा कि नीतीश कुमार अपने राजनीतिक भविष्य को किस दिशा में ले जाते हैं। यह निर्णय न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि बिहार की राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।

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