August 19, 2026

2026 में डेढ़ लाख से अधिक सरकारी नौकरी देगी बिहार सरकार, विभागों में भेजी गई वैकेंसी, टारगेट निर्धारित

पटना। बिहार सरकार ने वर्ष 2026 को रोजगार के लिहाज से निर्णायक बनाने की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि आने वाले वर्ष में डेढ़ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी जाएंगी। इसके लिए विभिन्न विभागों को रिक्त पदों से संबंधित प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं और नियुक्ति की समयसीमा भी तय की जा रही है। सरकार का दावा है कि यह कदम राज्य में बढ़ती बेरोजगारी को कम करने और युवाओं को स्थायी आजीविका देने की दिशा में अहम साबित होगा।
विभागों को भेजी गई रिक्तियों की सूची
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र के अनुसार, सभी विभागों से खाली पदों का विवरण मांगा गया है और कई विभागों ने अपनी रिक्तियों का प्रस्ताव सरकार को भेज भी दिया है। इन पदों पर चरणबद्ध तरीके से बहाली की जाएगी। सरकार का फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, प्रशासनिक सेवा और तकनीकी विभागों में बड़े पैमाने पर नियुक्ति करने पर है।
बीते वर्षों में कितनी नौकरियां मिलीं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2020 से 6 फरवरी 2026 के बीच बिहार सरकार ने कुल 9 लाख 84 हजार 141 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। इनमें 7 लाख 95 हजार 832 लोगों को स्थायी सरकारी नौकरी दी गई। इसके अलावा 1 लाख 17 हजार 784 लोगों को संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया, जबकि 70 हजार 525 लोगों को बाहरी एजेंसियों और स्रोतों के माध्यम से रोजगार मिला। सरकार का कहना है कि यह आंकड़ा राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा रोजगार सृजन है।
एक करोड़ रोजगार का दीर्घकालीन लक्ष्य
बिहार सरकार ने अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत सरकारी नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार, निजी क्षेत्र और संविदा आधारित अवसरों को भी शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय बहुआयामी रोजगार नीति से ही बड़े पैमाने पर युवाओं को अवसर मिल सकते हैं।
मंत्रिपरिषद के अहम फैसले
हाल ही में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 32 प्रस्तावों पर मुहर लगी। इनमें महिला रोजगार, छात्रवृत्ति, पुलिस बल की मजबूती और मानदेय वृद्धि जैसे कई अहम निर्णय शामिल हैं। सरकार का दावा है कि ये फैसले सीधे तौर पर आम लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगे और विकास की रफ्तार बढ़ाएंगे।
महिला रोजगार योजना का विस्तार
महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी। यह राशि दो किस्तों में मिलेगी और उन्हीं महिलाओं को दी जाएगी, जिन्होंने पहले मिली सहायता राशि का सही उपयोग कर अपना रोजगार सफलतापूर्वक चलाया है। सरकार के अनुसार अब तक 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं के खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के जरिए राशि भेजी जा चुकी है।
छह महीने बाद होगा मूल्यांकन
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि योजना के तहत रोजगार शुरू करने के छह महीने बाद महिलाओं के कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा। अगर यह पाया गया कि उनका व्यवसाय सही ढंग से चल रहा है, तो उन्हें आगे और सहायता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर यह राशि एकमुश्त या किस्तों में दी जा सकती है।
महिलाओं के उत्पादों को मिलेगा बाजार
सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि महिला उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री और विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए उन्हें परिधान निर्माण, दुग्ध उत्पाद बिक्री केंद्र और दीदी की रसोई जैसी सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि बाजार मिलने से महिलाओं की आमदनी स्थायी रूप से बढ़ेगी।
छात्रवृत्ति में बड़ा इजाफा
शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के करीब 27 लाख विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि को दोगुना कर दिया गया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी और स्कूल व कॉलेज छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी आएगी।
पुलिस बल को मजबूत करने की तैयारी
कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मंत्रिपरिषद ने पुलिस विभाग से जुड़े कई फैसले लिए हैं। विशेष सहायक पुलिस बल के जवानों का मानदेय बढ़ाने को मंजूरी दी गई है, जो आदेश जारी होने की तिथि से लागू होगा। इसके साथ ही अपराध नियंत्रण और उग्रवाद से निपटने के लिए बल को और सक्षम बनाया जाएगा।
सेवानिवृत्त जवानों को मिलेगा मौका
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 17 हजार पदों पर भारतीय सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त जवानों की अनुबंध पर नियुक्ति की जाएगी। इससे पुलिस व्यवस्था को अनुभवी बल मिलेगा और सेवानिवृत्त जवानों को सम्मानजनक रोजगार का अवसर भी मिलेगा।
विकास और रोजगार का दावा
सरकार का कहना है कि ये फैसले रोजगार, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देंगे। यदि योजनाएं तय समय पर और प्रभावी ढंग से लागू हुईं, तो बिहार में आर्थिक और सामाजिक विकास को तेज गति मिल सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि घोषित लक्ष्य जमीन पर कितनी तेजी से और कितनी पारदर्शिता के साथ पूरे किए जाते हैं।

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