विधान परिषद चुनाव से पहले गरमाई बिहार की राजनीति, चिराग पासवान ने विपक्षी गठबंधन और राजद पर साधा निशाना

  • विपक्षी एकता को बताया अवसरवादी गठजोड़, कहा- विचारधारा नहीं बल्कि राजनीतिक मजबूरी का मंच
  • विधान परिषद में बढ़ते प्रतिनिधित्व पर जताया गर्व, सुरक्षा और नेतृत्व की गंभीरता पर भी उठाए सवाल

पटना। बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव और आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने विपक्षी दलों के महागठबंधन, सुरक्षा व्यवस्था तथा राष्ट्रीय जनता दल की राजनीतिक कार्यशैली को लेकर तीखे बयान दिए हैं। उनके वक्तव्यों ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। चिराग पासवान ने विपक्षी दलों के गठबंधन को लेकर कहा कि यह किसी साझा विचारधारा या सिद्धांत पर आधारित राजनीतिक मंच नहीं है, बल्कि परिस्थितियों से उपजा ऐसा गठजोड़ है, जिसका उद्देश्य केवल राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न दल अपने-अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए एक मंच पर आए हैं, जबकि उनके बीच वैचारिक समानता का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। विपक्षी गठबंधन की हालिया बैठक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों से सहयोगी दलों की असंतुष्टि की खबरें सामने आ रही हैं। उनके अनुसार यह स्थिति दर्शाती है कि गठबंधन के प्रमुख दल अपने सहयोगियों का विश्वास बनाए रखने में सफल नहीं रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और राजनीतिक लाभ की राजनीति ने गठबंधन की विश्वसनीयता को कमजोर किया है। उनका कहना था कि कई पुराने सहयोगी दल अब स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिसके कारण गठबंधन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। चिराग पासवान ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में यह एक विचित्र स्थिति है कि जिन नेताओं और दलों के खिलाफ कभी गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए जाते थे, आज वही नेता एक-दूसरे के साथ मंच साझा कर रहे हैं। उनके अनुसार यह दर्शाता है कि वर्तमान गठबंधन राजनीतिक सुविधा पर आधारित है, न कि सिद्धांतों और मूल्यों पर। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि गठबंधन के सहयोगी दल अब एक-दूसरे की कमियों और विवादों पर पर्दा डालने में अधिक रुचि रखते हैं। विधान परिषद चुनाव को लेकर चिराग पासवान ने अपनी पार्टी की उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायकों के समर्थन और संगठन की मजबूती के कारण विधान परिषद में पार्टी का प्रतिनिधित्व बढ़ने जा रहा है। इसे उन्होंने संगठन के विस्तार और राजनीतिक प्रभाव में वृद्धि का संकेत बताया। उन्होंने पार्टी उम्मीदवार अशरफ अंसारी की विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए कहा कि वे लंबे समय से पार्टी और स्वर्गीय रामविलास पासवान के विश्वसनीय सहयोगी रहे हैं। चिराग ने कहा कि अशरफ अंसारी ने कभी किसी पद या व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा नहीं की, बल्कि हर परिस्थिति में संगठन के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। उनके अनुसार ऐसे समर्पित और कर्मठ कार्यकर्ता को विधान परिषद भेजना पार्टी के लिए सम्मान और गर्व का विषय है। राज्य की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे पर भी चिराग पासवान ने अपनी प्रतिक्रिया दी। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा सुरक्षा में कटौती को लेकर उठाए गए सवालों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सुरक्षा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को दी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था सुरक्षा एजेंसियों के मूल्यांकन और परिस्थितियों के आधार पर तय की जाती है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि समय-समय पर उनकी सुरक्षा श्रेणी में भी परिवर्तन होता रहा है। इसलिए सुरक्षा में वृद्धि या कमी को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी निर्णय के रूप में समझा जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस विषय को राजनीतिक विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति को लेकर भी चिराग पासवान ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कोई उम्मीदवार किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के लिए चुनाव मैदान में उतरता है, तब पार्टी नेतृत्व की उपस्थिति और समर्थन उसके प्रति गंभीरता का संकेत होता है। उनके अनुसार नेतृत्व की अनुपस्थिति से यह संदेश जाता है कि संगठन उस प्रक्रिया को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान के इन बयानों का उद्देश्य केवल विपक्षी दलों पर हमला करना ही नहीं, बल्कि अपनी पार्टी की राजनीतिक सक्रियता और संगठनात्मक मजबूती को भी प्रदर्शित करना है। विधान परिषद चुनाव के साथ-साथ आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए बिहार में राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। फिलहाल चिराग पासवान के बयानों ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। विपक्षी दलों की रणनीति, गठबंधन की एकजुटता, विधान परिषद चुनाव और नेतृत्व की भूमिका जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने रहने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश की राजनीति का तापमान और बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

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