August 20, 2026

प्रदेश में रात में डीजे और तेज लाउडस्पीकर पर रोक, प्रेशर हॉर्न के खिलाफ भी सख्ती, उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई

  • पटना हाईकोर्ट का ध्वनि प्रदूषण पर कड़ा रुख, शादी समारोह और बैंक्वेट हॉल में तेज संगीत बजाने की नहीं होगी अनुमति
  • कटिहार मॉडल पूरे बिहार में लागू करने के निर्देश, करीब 1500 थानों को लगातार कार्रवाई करने का आदेश

पटना। बिहार में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने डीजे, लाउडस्पीकर, विवाह समारोह, बैंक्वेट हॉल और वाहनों में लगाए जाने वाले तेज प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल को लेकर राज्यभर में कड़े निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि रात 9:55 बजे के बाद डीजे, लाउडस्पीकर अथवा विवाह और अन्य समारोहों में तेज आवाज में संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी। आदेश का उद्देश्य रात के समय होने वाले शोर-शराबे पर रोक लगाना और लोगों को शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना है। न्यायमूर्ति राजीव रॉय की एकल पीठ ने ध्वनि प्रदूषण और सड़कों पर वाहनों से होने वाले अत्यधिक शोर से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि दिन के समय भी लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि उपकरणों की आवाज निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर रखी जानी चाहिए। धार्मिक आयोजन, शादी समारोह अथवा सार्वजनिक कार्यक्रम के नाम पर अनियंत्रित शोर की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने अस्पतालों और विद्यालयों के आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से सख्ती बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इन इलाकों को शांत क्षेत्र के रूप में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे स्थानों पर अनावश्यक हॉर्न बजाने, तेज आवाज में संगीत चलाने और अन्य प्रकार के शोर पर नियंत्रण रखने की जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस की होगी। हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि इसका असर लोगों की दिनचर्या, स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर भी पड़ता है। देर रात तक तेज आवाज में बजने वाले डीजे और लाउडस्पीकर के कारण आसपास रहने वाले लोगों, बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और विद्यार्थियों को परेशानी होती है। इसलिए सार्वजनिक शांति और व्यक्तिगत मनोरंजन के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। मामले की सुनवाई के दौरान वाहनों में लगाए जाने वाले प्रेशर हॉर्न का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अदालत ने कटिहार जिले के पोठिया थाना क्षेत्र में प्रेशर हॉर्न के खिलाफ चलाए गए अभियान की सराहना की। बताया गया कि वहां एक सप्ताह के भीतर तेज और प्रतिबंधित हॉर्न के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लगभग एक लाख दस हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। इस कार्रवाई को उदाहरण मानते हुए हाईकोर्ट ने कटिहार मॉडल को पूरे बिहार में लागू करने का निर्देश दिया है। राज्य के करीब 1500 थानों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत प्रेशर हॉर्न के खिलाफ लगातार अभियान चलाने को कहा गया है। अदालत का मानना है कि यह कार्रवाई केवल कुछ दिनों तक चलने वाला विशेष अभियान नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे नियमित प्रक्रिया के रूप में लागू किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र में देर रात होने वाले कथित उपद्रव का मामला भी अदालत के सामने आया। हॉस्पिटो इंडिया रोड और बांस घाट के आसपास तेज गति से बाइक चलाने, तेज आवाज वाले वाहनों और देर रात तक लाउडस्पीकर बजने की शिकायतों का जिक्र किया गया। स्थानीय लोगों की ओर से कहा गया कि देर रात होने वाले शोर के कारण लोगों का घरों में रहना और सोना तक मुश्किल हो जाता है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शिवेंद्र किशोर ने संबंधित थाना प्रभारी के हलफनामे पर सवाल उठाते हुए अदालत को इलाके की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि देर रात तक तेज आवाज और बाइक सवारों के कथित उपद्रव से स्थानीय लोग परेशान हैं। इस पर न्यायमूर्ति राजीव रॉय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोई तस्वीर या वीडियो थाना प्रभारी द्वारा दिए गए तथ्यों को गलत साबित करता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अदालत की इस टिप्पणी को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। मामले में न्यायालय की सहायता कर रहे न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता अजय ने कहा कि राज्यभर में पुलिस की ओर से शुरुआती कार्रवाई संतोषजनक है, लेकिन ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ अभियान को लगातार जारी रखना जरूरी है। उन्होंने राज्य सरकार से सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का सुझाव दिया। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने अदालत को भरोसा दिलाया कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति राज्य के प्रमुख अधिकारियों, सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों तक तत्काल पहुंचाई जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत के निर्देश केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर भी प्रभावी ढंग से लागू हों। पटना हाईकोर्ट के इस फैसले से अब यह संदेश स्पष्ट है कि शादी समारोह हो, धार्मिक आयोजन हो, कोई सार्वजनिक कार्यक्रम हो या सड़क पर चलने वाला वाहन, किसी को भी सार्वजनिक शांति और लोगों की रात की नींद में बाधा डालने की छूट नहीं दी जा सकती। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन पर है कि ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जारी इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए और लोगों को वास्तव में शांत एवं सुरक्षित वातावरण मिल सके।

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