राज्यसभा जाने की इच्छा पर अवध ओझा का बड़ा खुलासा, बोले- केजरीवाल से खुद कही थी बात
- आप छोड़ने से पहले अरविंद केजरीवाल से हुई थी बातचीत, पंजाब से राज्यसभा भेजे जाने की जताई थी इच्छा
- केजरीवाल के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ, प्रधानमंत्री मोदी की भी सराहना; दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद राजनीति से संन्यास ले चुके हैं ओझा
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली हार के कुछ महीने बाद राजनीति से संन्यास लेने वाले चर्चित शिक्षक और पूर्व आप नेता अवध ओझा ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि वह राज्यसभा जाना चाहते थे और इस इच्छा के बारे में उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से खुलकर बात भी की थी। ओझा ने बताया कि जब उन्होंने पार्टी छोड़ने का मन बनाया, तब केजरीवाल ने उनसे इसकी वजह पूछी थी और उन्हें इस्तीफा देने से रोकने की कोशिश भी की थी। अवध ओझा ने यह खुलासा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान किया। कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की और दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल के कार्यों की सराहना की। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले ओझा ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन केजरीवाल के कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कुछ कामों को वह महत्वपूर्ण मानते हैं। ओझा ने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हुए बदलाव को उन्होंने स्वयं देखा है। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चों में भी शिक्षा के प्रभाव का उदाहरण देखने की बात कही। उनके अनुसार, केजरीवाल ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत जीवन या उसका राजनीतिक आचरण कैसा है, इस बारे में वह टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। राज्यसभा जाने की अपनी इच्छा के बारे में अवध ओझा ने बेबाकी से बताया कि उन्होंने केजरीवाल से बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखी थी। उनके अनुसार, उन्होंने कहा था कि यदि पार्टी पंजाब से लोगों को राज्यसभा भेज रही है तो उन्हें भी पंजाब से राज्यसभा भेजा जा सकता है। ओझा ने यह भी स्पष्ट किया कि केजरीवाल ने उन्हें राज्यसभा की सदस्यता देने का औपचारिक प्रस्ताव दिया था या नहीं, इसकी वह पुष्टि नहीं कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी इच्छा उनके सामने जरूर रखी थी। ओझा ने बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने पार्टी छोड़ने का मन बनाया तो केजरीवाल ने उनसे पूछा था कि वह इस्तीफा क्यों देना चाहते हैं। इसी दौरान राज्यसभा जाने की इच्छा को लेकर भी बातचीत हुई। ओझा के मुताबिक, उन्होंने अपनी इच्छा स्पष्ट करते हुए कहा था कि वह राज्यसभा जरूर जाना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें इसके लिए तैयारी करने की जरूरत है। अवध ओझा दिसंबर 2024 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने पार्टी के लिए चुनावी गतिविधियों में हिस्सा लिया और दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार भी किया। चुनाव के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने का फैसला किया। अब अपने राजनीतिक अनुभव से जुड़ी बातचीत का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया है कि पार्टी में रहते हुए उनकी राज्यसभा जाने की इच्छा थी। आम आदमी पार्टी की ओर से पंजाब के कई नेताओं को राज्यसभा भेजा गया है। मार्च 2022 में हरभजन सिंह, राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को राज्यसभा भेजा गया था। बाद में संजीव अरोड़ा के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर अक्टूबर 2025 में राजिंदर गुप्ता को राज्यसभा भेजा गया। अवध ओझा ने इसी संदर्भ में पंजाब से राज्यसभा भेजे जाने की अपनी इच्छा का उल्लेख किया। ओझा के इस बयान ने उनके राजनीतिक सफर को लेकर एक नई चर्चा छेड़ दी है। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले चर्चित शिक्षक के रूप में पहचान बना चुके थे। पढ़ाने की उनकी शैली और सामाजिक माध्यमों पर उनकी लोकप्रियता ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद उनके राजनीतिक जीवन को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी और अरविंद केजरीवाल दोनों की अलग-अलग संदर्भों में तारीफ करने के बाद ओझा ने यह संदेश भी दिया कि किसी नेता के राजनीतिक विचारों से अलग रहते हुए उसके अच्छे कार्यों को स्वीकार किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य को ऐसे क्षेत्र बताया, जहां केजरीवाल सरकार के काम को वह सकारात्मक मानते हैं। अवध ओझा का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने पहली बार सार्वजनिक तौर पर राज्यसभा जाने की अपनी राजनीतिक इच्छा का खुलासा किया है। हालांकि, उन्होंने यह दावा नहीं किया कि केजरीवाल ने उन्हें राज्यसभा भेजने का कोई निश्चित प्रस्ताव दिया था। उन्होंने केवल इतना बताया कि उन्होंने स्वयं अपनी इच्छा पार्टी नेतृत्व के सामने रखी थी। दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके ओझा अब शिक्षा के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।


