August 18, 2026

सिवान में एके-47 से फायरिंग की बात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मानी, चार राउंड हवा में चलाए गए

  • बिहार सरकार का दावा-, एके-47 की गोली से कोई घायल नहीं
  • प्रदर्शन के दौरान 69 प्राथमिकी और करीब 500 गिरफ्तारियां, दिल्ली पुलिस ने भी अत्यधिक बल के आरोपों को नकारा

नई दिल्ली/पटना। बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान सिवान में एके-47 से फायरिंग के मामले को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। सरकार ने अदालत में दाखिल जवाबी हलफनामे में पहली बार स्पष्ट रूप से माना है कि प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने एके-47 से गोलियां चलाई थीं। हालांकि, सरकार का दावा है कि पुलिसकर्मी ने भीड़ में फंसने के बाद अपनी सुरक्षा के लिए हवा में चार राउंड फायर किए और इस फायरिंग में कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ओर से जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने के आरोपों से भी साफ इनकार किया है। यह जवाब उन याचिकाओं के संदर्भ में दाखिल किया गया है, जिनमें छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित बर्बरता पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों दोनों की चोटों को गंभीरता से देखने की बात कही थी।
सिवान में पुलिसकर्मी ने हवा में चलाई गोलियां
बिहार सरकार के अनुसार, सिवान के जेपी चौक के पास प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी भीड़ के बीच फंस गया था। अपनी सुरक्षा के लिए उसने एके-47 से चार राउंड हवा में चलाए। सरकार का कहना है कि इन गोलियों से कोई घायल नहीं हुआ। सरकार ने यह भी बताया कि संबंधित पुलिसकर्मी को कथित गलत आचरण के कारण निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इससे पहले सिवान पुलिस भी यही कह चुकी थी कि जवान ने भीड़ से घिरने के बाद जान-माल और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हवा में फायरिंग की थी। हालांकि, एके-47 से फायरिंग को लेकर अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। सरकार ने बताया है कि हथियार के इस्तेमाल से जुड़ी बैलिस्टिक जांच भी चल रही है।
पिस्टल से चली गोलियों में तीन को मामूली चोट
हलफनामे में सरकार ने सिवान के हाथी चौक की एक अन्य घटना का भी जिक्र किया है। सरकार के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने और हटाने के लिए एक सहायक पुलिस उपनिरीक्षक ने पिस्टल से दो गोलियां चलाईं। इस घटना में तीन प्रदर्शनकारियों को हथियार से मामूली चोटें आईं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि इन तीनों की चोटें एके-47 की गोलियों से नहीं हुई थीं। इस तरह सरकार ने सिवान में एके-47 और पिस्टल से हुई फायरिंग को अलग-अलग घटनाओं के रूप में अदालत के सामने रखा है।
69 प्राथमिकी, करीब 500 लोगों की गिरफ्तारी
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान बिहार के कई हिस्सों में हिंसा की घटनाएं हुईं। राज्य के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने पुलिस और सरकारी कर्मचारियों पर हमला किया तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। सरकार के हलफनामे के मुताबिक, 22 से 25 जुलाई के बीच राज्य में कुल 69 प्राथमिकी दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रखने वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया। इसके अलावा किशोर न्याय बोर्ड के निर्देश पर 75 नाबालिगों को भी छोड़ा गया।
पुलिस और सरकारी कर्मचारियों के घायल होने का दावा
राज्य सरकार ने अपने जवाब में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सरकारी कर्मचारियों के घायल होने का भी आंकड़ा दिया है। सरकार के अनुसार, छपरा में दो प्रखंड विकास पदाधिकारी, तीन निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक और 11 कांस्टेबल घायल हुए। सरकार ने दावा किया कि पूरे राज्य में कुल 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए। एक प्रखंड विकास पदाधिकारी की आंख में गंभीर चोट आने और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की बात भी हलफनामे में कही गई है। सरकार का तर्क है कि प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हालात बिगड़ गए थे और पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। इसी आधार पर उसने अत्यधिक या अनुपातहीन बल प्रयोग के आरोपों को खारिज किया है।
दिल्ली पुलिस ने भी दिया अपना जवाब
इसी मामले से जुड़ी याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर मार्च करने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड की कई परतें तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की और स्थिति हिंसक हो गई। पुलिस के मुताबिक, करीब पांच हजार जवानों को लगभग तीन किलोमीटर के क्षेत्र में 30 हजार से अधिक लोगों की भीड़ संभालनी पड़ रही थी। पुलिस ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान 240 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 200 प्रदर्शनकारी या आम लोग घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने का आरोप सही नहीं है। पुलिस का दावा है कि भीड़ में कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और असामाजिक तत्व भी शामिल थे
नाखून वाली लाठी के आरोप से भी इनकार
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान नाखून लगी लाठी के इस्तेमाल के आरोप को भी खारिज किया है। पुलिस के अनुसार, वीडियो में ऐसी लाठी दिखाई देती है, लेकिन वह पुलिसकर्मी के हाथ में नहीं बल्कि एक प्रदर्शनकारी के पास थी। पुलिस ने यह भी कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सामान्य लाठी का इस्तेमाल निर्धारित तरीकों में शामिल है। सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों के संबंध में भी दिल्ली पुलिस ने सफाई दी। उसके मुताबिक, विशेष शाखा, विशेष प्रकोष्ठ, अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस के निगरानीकर्मी भीड़ के बीच मौजूद थे ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके।
अब सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई पर नजर
सिवान की फायरिंग को लेकर सरकार का हलफनामा एक तरफ पुलिसकर्मी द्वारा एके-47 चलाए जाने की पुष्टि करता है, वहीं दूसरी तरफ इससे किसी के घायल नहीं होने का दावा करता है। दूसरी ओर, प्रदर्शन के दौरान चोटिल लोगों और पुलिस कार्रवाई को लेकर याचिकाकर्ताओं के आरोप अलग हैं। इससे मामले में तथ्य और जवाबदेही को लेकर विवाद बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के सामने अब पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग की आवश्यकता और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के अलग-अलग पहलुओं की जांच का सवाल महत्वपूर्ण रहेगा। अदालत ने इससे संबंधित सामग्री और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए थे। ऐसे में बिहार सरकार का जवाब मामले की तस्वीर का एक पक्ष सामने रखता है। सिवान में एके-47 से कितने राउंड वास्तव में चले, उनका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ और किसी व्यक्ति को उनसे चोट लगी या नहीं, इन सवालों पर चल रही जांच के निष्कर्ष आगे की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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