अशोक धाम हादसे पर प्रशांत किशोर का हमला, बोले- मुआवजे से नहीं तय होगी जवाबदेही, जबाब दे सरकार
- लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचकर घायलों और मृतकों के परिजनों से मिले जन सुराज संयोजक
- कहा- सात मौतों के जिम्मेदारों पर अब तक कार्रवाई नहीं, प्रशासन की लापरवाही की हो जांच
लखीसराय। अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी के दौरान हुई भगदड़ के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। बांकीपुर से नवनिर्वाचित और जन सुराज पार्टी के संयोजक प्रशांत किशोर मंगलवार को लखीसराय पहुंचे। उन्होंने सदर अस्पताल जाकर हादसे में घायल श्रद्धालुओं से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इसके बाद वह मृतकों के परिजनों से मिलने उनके घर भी पहुंचे। इस दौरान प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर जमकर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि देने से केवल खानापूर्ति नहीं हो सकती। इतनी बड़ी घटना में जवाबदेही तय होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि सात लोगों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के बाद अब तक किसी कर्मचारी या अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने लखीसराय सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद घायल श्रद्धालुओं को सरकारी अस्पताल में पर्याप्त इलाज नहीं मिल सका, जिसके कारण उनके परिजनों को उन्हें निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में ले जाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि एक निजी नर्सिंग होम में दो घायल मरीज गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय सदर अस्पताल में केवल आयुष चिकित्सक मौजूद थे। उनके अनुसार, बाद में अस्पताल में कोई मरीज नहीं रह गया और घायल या तो अपने घर चले गए या निजी अस्पतालों में स्थानांतरित हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं की गई। हालांकि, स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
स्थानीय नेताओं पर भी साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने लखीसराय के स्थानीय विधायक और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा तथा केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी जिम्मेदारी तय करने को लेकर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने विजय कुमार सिन्हा के घटनास्थल और अस्पताल पहुंचने का जिक्र करते हुए कहा कि केवल घायलों से मुलाकात करने और सांत्वना देने से काम नहीं चलेगा। घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने ललन सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर ऐसी गंभीर घटना के बाद अपेक्षित सक्रियता दिखाई देनी चाहिए थी।
तीसरी सोमवारी की भीड़ का नहीं था इंतजाम?
अशोक धाम मंदिर में तीसरी सोमवारी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान बिजली का एक खंभा गिरने और करंट फैलने की अफवाह के बाद अचानक भगदड़ मच गई। जान बचाने की कोशिश में लोग तेजी से भागने लगे। इस दौरान कई श्रद्धालु जमीन पर गिर गए और भीड़ में दबने से उनकी मौत हो गई। हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हुए। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार मौके पर पहुंचे। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर स्थिति को नियंत्रित किया गया। प्रशांत किशोर ने कहा कि सावन की सोमवारी पर अशोक धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके बावजूद भीड़ प्रबंधन को लेकर पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। उनका आरोप है कि प्रशासन भीड़ के दबाव का सही अनुमान लगाने में विफल रहा।
विजय सिन्हा ने भी मानी प्रशासनिक चूक
हादसे के बाद स्थानीय विधायक और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी लखीसराय पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात की और जिला प्रशासन को उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना भी दी। मीडिया से बातचीत में विजय कुमार सिन्हा ने प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि तीसरी सोमवारी पर जुटने वाली भारी भीड़ और उसके दबाव का अनुमान लगाने में प्रशासन से चूक हुई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
मुख्यमंत्री ने चार-चार लाख की सहायता की घोषणा की
हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताया। उन्होंने मृत श्रद्धालुओं के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक के आश्रित को चार लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर शोक जताया और मृतकों की आत्मा की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
अस्पताल के पास लोगों ने किया सड़क जाम
हादसे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखने को मिला। सदर अस्पताल के पास लोगों ने करीब 30 मिनट तक सड़क जाम कर विरोध जताया। लोगों का आरोप था कि मंदिर परिसर और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी तथा प्रशासन की ओर से किए गए दावे मौके की स्थिति से मेल नहीं खाते। अब हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था क्यों विफल हुई। प्रशांत किशोर ने इसी सवाल को राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। सरकार की ओर से जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। ऐसे में जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और प्रशासनिक स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय होती है।


