दाख़िल – ख़ारिज में भ्रष्टाचार का नंगा खेल, मंत्री ने बताया गंभीर, दिये जांच का आदेश
बेगूसराय/पटना, संवाददाता। बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर अंचल कार्यालय में भूमि दाखिल-खारिज मामले को लेकर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, प्रशासनिक संरक्षण और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में जिले के मूल निवासी तथा वर्तमान में लखनऊ में रह रहे ललन कुमार ने बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल को विस्तृत आवेदन देकर उच्चस्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत पत्र पर संज्ञान लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने मामले को गंभीर प्रकृति का बताते हुए गोपनीय जांच कराने तथा शीघ्र जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मंत्री की हस्तलिखित टिप्पणी में प्रकरण को गंभीर मानते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को अग्रसारित किए जाने का भी उल्लेख है। मंत्री के इस आदेश के बाद राजस्व विभाग में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

वर्षों से लंबित है दाखिल-खारिज का मामला
आवेदक ललन कुमार ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि वर्ष 2012 में खरीदी गई उनकी भूमि का दाखिल-खारिज मामला कई वर्षों से लंबित रखा गया है, जबकि उसी खाता-खेसरा संख्या से संबंधित अन्य खरीदारों का दाखिल-खारिज और जमाबंदी कार्य काफी पहले पूरा हो चुका है। उनका आरोप है कि केवल उनके मामले को जानबूझकर रोका गया, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आवेदन के अनुसार, जब उन्होंने अपने वैध भूमि प्रकरण का दाखिल-खारिज कराने का पुनः प्रयास किया तो उन्हें जानकारी मिली कि तत्कालीन अंचलाधिकारी एवं अंचल कार्यालय द्वारा उनकी भूमि को “रोक सूची” में डाल दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप आज तक उनकी भूमि का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है, जबकि उसी खाता-खेसरा के अन्य खरीदारों का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है।
अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मी पर आरोप
शिकायत में खोदावंदपुर की वर्तमान अंचलाधिकारी प्रीति कुमारी तथा उनके सहयोगी राजस्व कर्मी रंजीत कुमार पर रिश्वत मांगने, प्रशासनिक भ्रष्टाचार तथा पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होने के पीछे प्रशासनिक संरक्षण की भूमिका हो सकती है। आवेदन में कहा गया है कि मामले की विशेष से जांच कराई जाए ताकि तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।
पति के पदस्थापन और संभावित हितों के टकराव का भी उल्लेख
आवेदन में एक अन्य गंभीर बिंदु उठाते हुए कहा गया है कि वर्तमान अंचलाधिकारी प्रीति कुमारी के पति उमाशंकर यादव भी राजस्व विभाग में अंचल अधिकारी (सीओ) के पद पर किसी अन्य जिले में पदस्थापित बताए जाते हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि विभिन्न स्थानीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उमाशंकर यादव के विरुद्ध भी राजस्व विभाग में कुछ विभागीय मामलों या जांच चल रही है। आवेदन में यह संभावना व्यक्त की गई है कि यदि ऐसे तथ्यों की पुष्टि होती है तो संबंधित शिकायतों की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह भी दावा किया है कि संबंधित अधिकारियों एवं उनके परिवार के पास आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक चल-अचल संपत्ति और भारी मात्रा में नकद संपत्ति होने की चर्चा स्थानीय स्तर पर है। उन्होंने मांग की है कि सक्षम एजेंसियों द्वारा उनकी आय, संपत्ति, वित्तीय स्रोतों एवं लेन-देन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। आवेदन में कहा गया है कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए तो बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और अवैध धन-संपत्ति का खुलासा हो सकता है।
आवेदन में की गई प्रमुख मांगें
ललन कुमार ने अपने आवेदन में जो मांगें रखी हैं.उसके अनुसार
पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच किसी विशेष जांच दल, विजिलेंस अथवा स्वतंत्र समिति से कराई जाए.अंचलाधिकारी प्रीति कुमारी एवं राजस्व कर्मी रंजीत कुमार के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।उमाशंकर यादव एवं संबंधित अधिकारियों से जुड़े लंबित विभागीय मामलों की समीक्षा की जाए।संबंधित अधिकारियों की आय, चल-अचल संपत्ति एवं आर्थिक स्रोतों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।कार्यालय, सरकारी आवास एवं निजी परिसरों की आवश्यकतानुसार जांच/छापेमारी कराई जाए।
दाखिल-खारिज आवेदन संख्या 993/2025-26 की निष्पक्ष पुनः समीक्षा कर न्याय दिलाया जाए।भूमि का ऑनलाइन रिकॉर्ड बहाल कर वैध जमाबंदी एवं दाखिल-खारिज प्रक्रिया पूरी कराई जाए।मामले के निष्पक्ष निपटारे हेतु जांच किसी अन्य अधिकारी अथवा विशेष इकाई को सौंपी जाए।बिहार में भूमि मामलों में व्याप्त भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग तंत्र गठित किया जाए।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए लगातार प्रयासरत है। पूर्व एवं वर्तमान दोनों ही राजस्व मंत्रियों द्वारा विभागीय भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्त रुख अपनाने की बात कही जाती रही है। ऐसे में मंत्री द्वारा गोपनीय जांच का आदेश दिए जाने के बाद यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल आवेदन में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। इनकी सत्यता की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। अब देखना होगा कि विभागीय जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।

