क्या दीपक प्रकाश बनेंगे बिहार के पहले ‘अग्निवीर मंत्री’? 6 महीने की ‘नो-पेंशन, नो-गारंटी’ वाली सियासत पर चर्चा तेज
पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नया सियासी मुहावरा तेजी से वायरल हो रहा है— ‘अग्निवीर मंत्री’। सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को चुनौती मिलने और एनडीए से विधान परिषद (MLC) का टिकट कटने के बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश कुशवाहा की स्थिति को राजनीतिक गलियारों में इसी नजरिए से देखा जा रहा है। विपक्षी दल और सोशल मीडिया यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि क्या दीपक प्रकाश बिहार के पहले ऐसे ‘अग्निवीर मंत्री’ साबित होने जा रहे हैं, जिन्हें बिना कार्यकाल पूरा किए महज 6 महीने के भीतर ही कुर्सी छोड़नी पड़ रही है? सेना की ‘अग्निवीर योजना’ की तर्ज पर इस शब्द का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं द्वारा उन मंत्रियों पर तंज कसने के लिए किया जा रहा है जिनकी नियुक्ति में ‘स्थायित्व’ नहीं होता। दीपक प्रकाश के मामले में यह सटीक बैठता दिख रहा है। जैसे अग्निवीर 4 साल के लिए आते हैं, वैसे ही दीपक प्रकाश बिना चुनाव जीते (गैर-विधायक) सिर्फ 6 महीने की संवैधानिक मियाद पर मंत्री बने थे। 18 जून को होने वाले विधान परिषद चुनाव में एनडीए ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। यानी 6 महीने बाद सदन का सदस्य बनकर ‘परमानेंट’ होने का उनका मौका हाथ से निकल गया। फेसबुक प्रोफाइल से ‘मंत्री’ शब्द हटाने के बाद माना जा रहा है कि उनकी ‘अस्थायी सेवा’ समय से पहले ही समाप्त होने वाली है।


