महात्मा गांधी सेतु पर तीन घंटे तक थमा यातायात, भीषण जाम में फंसे हजारों वाहन

  • वाहनों के बढ़ते दबाव और दुर्घटना से बिगड़ी स्थिति, यात्रियों को घंटों करना पड़ा इंतजार
  • प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग के रूप में जेपी सेतु के उपयोग की अपील की, यातायात नियमों के पालन पर दिया जोर

पटना। राजधानी पटना को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले महात्मा गांधी सेतु पर गुरुवार की सुबह भारी यातायात दबाव के कारण भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। लगभग तीन घंटे तक चले इस जाम ने हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी। सुबह के व्यस्त समय में वाहनों की अत्यधिक संख्या और यातायात की धीमी रफ्तार के कारण सेतु पर लंबी कतारें लग गईं। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए, जिससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी देरी का सामना करना पड़ा। महात्मा गांधी सेतु बिहार की जीवनरेखा मानी जाती है और यह राजधानी पटना को वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा तथा उत्तर बिहार के अन्य जिलों से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इस सेतु से होकर गुजरते हैं। ऐसे में यातायात व्यवस्था में थोड़ी सी भी बाधा पूरे क्षेत्र की आवाजाही को प्रभावित कर देती है। गुरुवार सुबह भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। सुबह के समय कार्यालय, स्कूल, व्यापारिक गतिविधियों और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए निकलने वाले लोगों की संख्या अधिक होने के कारण सेतु पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। देखते ही देखते यातायात की गति धीमी पड़ गई और कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब सेतु पर एक ट्रक और एक पिकअप वाहन के बीच टक्कर हो गई। दुर्घटना में पिकअप वाहन का चालक घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने घायल चालक को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराते हुए उपचार के लिए हाजीपुर स्थित वैशाली अस्पताल भेजा। साथ ही दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात बहाल करने का प्रयास किया गया। हालांकि दुर्घटनाग्रस्त वाहन हटाए जाने के बाद भी जाम की स्थिति तुरंत सामान्य नहीं हो सकी। वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और सेतु पर पहले से मौजूद दबाव के कारण यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने में काफी समय लगा। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य समय से कहीं अधिक समय लगा। कुछ लोग आवश्यक बैठकों, कार्यालयी कार्यों और अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी देर से पहुंचे। जाम की सूचना मिलने के बाद यातायात पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर मोर्चा संभाल लिया। पुलिसकर्मियों ने वाहनों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने का प्रयास किया तथा यातायात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल भी लगाया गया। लगातार प्रयासों के बाद धीरे-धीरे जाम की स्थिति में सुधार हुआ और यातायात सामान्य होने लगा। जीरो माइल यातायात थाना प्रभारी नीरज कुमार झा ने बताया कि इन दिनों बढ़ती गर्मी के कारण लोग सुबह जल्दी यात्रा करना पसंद कर रहे हैं। यही वजह है कि सुबह के समय महात्मा गांधी सेतु पर वाहनों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन से चार दिनों से सुबह के समय इसी प्रकार की स्थिति देखने को मिल रही है और प्रायः सुबह नौ बजे तक यातायात प्रभावित रहता है। उन्होंने यह भी बताया कि केवल वाहनों की संख्या बढ़ना ही जाम का कारण नहीं है, बल्कि कुछ वाहन चालक यातायात नियमों का पालन नहीं करते। कई बार चालक निर्धारित लेन का उपयोग नहीं करते, बीच रास्ते से वाहन घुसाने की कोशिश करते हैं या यातायात संकेतों की अनदेखी करते हैं। इससे यातायात व्यवस्था बाधित होती है और जाम की समस्या और गंभीर हो जाती है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यदि संभव हो तो वे महात्मा गांधी सेतु के स्थान पर जेपी सेतु जैसे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। इससे महात्मा गांधी सेतु पर वाहनों का दबाव कम होगा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करने की भी अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि महात्मा गांधी सेतु पर बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है। बेहतर यातायात प्रबंधन, वैकल्पिक मार्गों का अधिक उपयोग और नियमों के प्रति जागरूकता ही ऐसी समस्याओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने और यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था करने की बात कही है।

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