बिहार में अब रेफर से पहले पता चलेगा अस्पताल में बेड है या नहीं, मरीजों में भागदौड़ से मिलेगी राहत
- 14 हजार स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी, डॉक्टर-दवा की भी होगी निगरानी
पटना। बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में मरीजों के लिए जल्द ही एक बड़ा डिजिटल बदलाव देखने को मिल सकता है। गंभीर मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने के बाद अक्सर सामने आने वाली बेड की समस्या को दूर करने के लिए राज्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यवस्था तैयार की जा रही है। इस व्यवस्था के जरिए सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध गहन चिकित्सा कक्ष, वार्ड और सामान्य बेड की स्थिति की वास्तविक समय में जानकारी मिल सकेगी। ऐसे में किसी मरीज को बड़े अस्पताल भेजने से पहले ही डॉक्टर यह पता कर सकेंगे कि वहां बेड उपलब्ध है या नहीं।
रेफर करने से पहले मिलेगी अस्पताल की जानकारी
अभी कई मामलों में जिला अस्पताल या अनुमंडलीय अस्पताल से गंभीर मरीज को बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। मरीज के परिजन एंबुलेंस से उसे लेकर मेडिकल कॉलेज या दूसरे बड़े अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन वहां पहुंचने पर पता चलता है कि गहन चिकित्सा कक्ष या सामान्य वार्ड में बेड उपलब्ध नहीं है। इसके बाद मरीज और उसके परिजनों को दूसरे अस्पताल की तलाश में भटकना पड़ता है। गंभीर स्थिति में यह देरी मरीज के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था इस समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती है। जिला अस्पताल का डॉक्टर मरीज को रेफर करने से पहले संबंधित बड़े अस्पताल में उपलब्ध बेड की स्थिति देख सकेगा। इसके साथ ही वहां डॉक्टरों की उपलब्धता और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। इससे मरीज को सही जगह भेजने में आसानी होगी और इलाज शुरू होने में लगने वाला समय भी कम किया जा सकेगा।
15 अगस्त से नई रेफरल व्यवस्था पर जोर
बिहार में 15 अगस्त से नई रेफरल व्यवस्था को प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में डिजिटल प्रणाली को जल्द लागू करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। शुरुआती स्तर पर प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को इससे जोड़ने की तैयारी है। व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।
14 हजार स्वास्थ्य संस्थान होंगे नेटवर्क से जुड़े
इस डिजिटल योजना का दायरा काफी बड़ा रखा गया है। बिहार के करीब 14 हजार स्वास्थ्य संस्थानों को एक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। इसमें स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और बड़े चिकित्सा संस्थान शामिल किए जा सकते हैं। अगर यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी होती है तो स्वास्थ्य विभाग के पास राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति की एक व्यापक डिजिटल तस्वीर उपलब्ध होगी। इससे अधिकारियों को यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि किस अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक है, कहां बेड की कमी है और किन संस्थानों में अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है।
बेड के साथ डॉक्टर और दवाओं की भी निगरानी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल बेड की जानकारी उपलब्ध कराना नहीं है। अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं के वितरण और विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की भी डिजिटल निगरानी किए जाने की योजना है। इससे स्वास्थ्य विभाग को संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है। किसी अस्पताल में डॉक्टरों या दवाओं की कमी होने पर उसकी जानकारी समय रहते सामने आ सकेगी। इसी तरह किसी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं पर अधिक दबाव होने की स्थिति में वहां अतिरिक्त व्यवस्था करने में भी मदद मिल सकती है।
क्यूआर कोड से मिलेगा बाह्य रोगी विभाग का टोकन
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को डिजिटल बनाने की कोशिश अस्पतालों में मरीजों की पंजीकरण प्रक्रिया तक भी पहुंच रही है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत क्यूआर कोड के माध्यम से बाह्य रोगी विभाग का डिजिटल टोकन लेने की सुविधा विकसित की जा रही है। इस व्यवस्था में मरीज को लंबी कतार में खड़े रहने के बजाय क्यूआर कोड स्कैन करके टोकन मिल सकेगा। वहीं, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते के माध्यम से मरीज के पर्चे, जांच रिपोर्ट और एक्स-रे जैसी चिकित्सा संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। इससे मरीज की पुरानी चिकित्सा जानकारी जरूरत पड़ने पर आसानी से देखी जा सकेगी।
3900 से अधिक केंद्रों पर विशेषज्ञों की सलाह
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए दूरस्थ चिकित्सा सेवा भी इस डिजिटल बदलाव का अहम हिस्सा है। राज्य में 3900 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दूरस्थ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम चल रहा है। इसके जरिए स्थानीय स्तर पर मौजूद मरीज वीडियो माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ले सकेंगे। इसके अलावा जिला अस्पतालों को दूरस्थ गहन चिकित्सा कक्ष सहायता से जोड़ने की भी योजना है। इससे गंभीर मरीजों के इलाज में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह समय पर मिल सकेगी और हर गंभीर मरीज को तत्काल बड़े शहर के अस्पताल तक ले जाने की जरूरत कम हो सकती है।
कागज से डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ता स्वास्थ्य विभाग
बिहार की यह पहल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को कागजी रिकॉर्ड और रजिस्टर की व्यवस्था से निकालकर डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बेड की वास्तविक समय में जानकारी देने वाली व्यवस्था अभी विकास और लागू करने की शुरुआती प्रक्रिया में है, लेकिन इसके पूरी तरह काम करने पर मरीजों को सबसे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। भविष्य में डॉक्टर के पास रेफर करने से पहले ही यह जानकारी उपलब्ध हो सकेगी कि किस अस्पताल में बेड है, कौन-सी सुविधा उपलब्ध है और विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद हैं या नहीं। इससे गंभीर मरीजों के इलाज में होने वाली अनावश्यक देरी कम करने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।


