पटना में अवैध अतिक्रमण पर चलेगा प्रशासन का बुलडोजर, गंगा किनारे सरकारी जमीन से हटेंगे 259 मकान, प्रशासन ने कसी कमर
- भद्रघाट से कंगनघाट के बीच बड़े अतिक्रमण हटाओ अभियान की तैयारी
- दो चरणों में होगी कार्रवाई, पुलिस बल की मांग; मकान, गोदाम, गैराज और खटाल भी दायरे में
पटना। पटना सिटी इलाके में गंगा के किनारे सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन अब बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी में है। भद्रघाट से कंगनघाट के बीच सरकारी जमीन पर बने करीब 259 मकानों समेत कई स्थायी और अस्थायी निर्माणों को हटाने की तैयारी की गई है। प्रशासन ने अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की है। प्रस्तावित कार्रवाई को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, गंगा किनारे सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किए गए निर्माणों को लेकर संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद अब प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
मकानों के साथ कई अन्य निर्माण भी हटेंगे
अतिक्रमण हटाने के प्रस्तावित अभियान में केवल मकान ही शामिल नहीं हैं। प्रशासन की सूची में गोदाम, गैराज, चहारदीवारी, खटाल, ईंट भट्ठे और अन्य स्थायी एवं अस्थायी निर्माण भी शामिल किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए चिह्नित सभी निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान के लिए पटना सिटी और दीदारगंज अंचल के अधिकारियों की ओर से पुलिस बल की मांग की गई है। प्रशासन की तैयारी के अनुसार, बुधवार से कार्रवाई शुरू किए जाने की संभावना है। अभियान के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न हो, इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
पहले 30 मीटर के दायरे में होगी कार्रवाई
अतिक्रमण हटाने का अभियान दो चरणों में चलाया जाएगा। पहले चरण में गंगा किनारे बनी मौजूदा सड़क से 30 मीटर यानी करीब 100 फीट के दायरे में आने वाले निर्माणों को हटाया जाएगा। प्रशासन की ओर से इस क्षेत्र को प्राथमिकता के आधार पर खाली कराने की तैयारी की गई है। पहले चरण की कार्रवाई पूरी होने के बाद दूसरे चरण में इससे बाहर बचे हुए क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इस तरह प्रशासन चरणबद्ध तरीके से पूरे चिन्हित क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश करेगा।
259 लोगों को पहले ही दिया गया था नोटिस
अभियान शुरू करने से पहले प्रशासन की ओर से 259 लोगों को नोटिस जारी किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, पांच अगस्त को मामले की सुनवाई के बाद आदेश जारी किया गया था। इसके बाद माइकिंग के माध्यम से संबंधित लोगों को सरकारी जमीन खाली करने की सूचना दी गई और 14 अगस्त तक का समय दिया गया था। निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद अब प्रशासन की ओर से अगली कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। मौके पर पुलिस बल की उपलब्धता, अधिकारियों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है।
2021 में पटना जिले में शामिल हुई जमीन
गंगा के दक्षिणी किनारे स्थित यह इलाका पहले सारण और वैशाली जिलों के प्रशासनिक नियंत्रण में था। भौगोलिक स्थिति के कारण इस क्षेत्र की निगरानी और प्रशासनिक कार्यों में कई तरह की कठिनाइयां सामने आती थीं। इसके बाद राज्य सरकार ने नवंबर 2021 में इस क्षेत्र को पटना जिले में शामिल करने का फैसला लिया। इस प्रशासनिक बदलाव के तहत सारण जिले की करीब 3,212 एकड़ और वैशाली जिले की लगभग 331.5 एकड़ जमीन पटना जिले में शामिल की गई थी। इस क्षेत्र में जेपी सेतु, पहलेजा घाट और कंगनघाट के आसपास की जमीन भी आती है। पटना जिले में शामिल होने के बाद इन क्षेत्रों के प्रशासनिक प्रबंधन और जमीन से जुड़े मामलों पर पटना प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई।
पहले भी चल चुका है अतिक्रमण हटाओ अभियान
गंगा किनारे स्थित इस इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पहले भी की जा चुकी है। उस दौरान प्रशासन ने कुछ कच्चे और पक्के निर्माणों को हटाया था। हालांकि, जमीन पर अपना दावा करने वाले कुछ लोगों ने कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पर रोक लग गई थी। अब प्रशासन ने एक बार फिर चिन्हित सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी शुरू की है। इस बार प्रस्तावित अभियान में भद्रघाट से कंगनघाट के बीच चिन्हित 259 मकानों के अलावा अन्य निर्माणों को भी कार्रवाई के दायरे में रखा गया है।
पुलिस बल की मौजूदगी में होगी कार्रवाई
अतिक्रमण हटाने के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रह सकते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। पटना सिटी और दीदारगंज अंचल प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। प्रशासन की कोशिश है कि अभियान को चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाए। पहले चरण में सड़क से 30 मीटर के दायरे को खाली कराया जाएगा और इसके बाद दूसरे चरण में शेष चिन्हित क्षेत्र पर कार्रवाई होगी। फिलहाल प्रशासन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रस्तावित अभियान किस तरह आगे बढ़ता है और कितने निर्माण हटाए जाते हैं। कार्रवाई पूरी होने के बाद गंगा किनारे सरकारी जमीन का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण से मुक्त होने की उम्मीद है।


