इंडोनेशिया में 6.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

  • पालू और मध्य सुलावेसी क्षेत्र में सबसे अधिक महसूस हुए झटके, सुनामी की चेतावनी जारी नहीं
  • नुकसान का आकलन जारी, जून महीने में दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा बड़ा भूकंपीय झटका

नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया मंगलवार सुबह एक बार फिर तेज भूकंप के झटकों से दहल उठा। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार सुबह आए इस शक्तिशाली भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.8 दर्ज की गई। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई इलाकों में लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि समाचार लिखे जाने तक किसी के हताहत होने अथवा बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से जारी जानकारी के अनुसार भूकंप मंगलवार सुबह लगभग 8 बजकर 57 मिनट पर आया। इसका केंद्र इंडोनेशिया के भूभाग में 45 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। विशेषज्ञों का मानना है कि अपेक्षाकृत अधिक गहराई में आए भूकंप के कारण व्यापक विनाश की आशंका कुछ हद तक कम हो गई, लेकिन इसके झटके दूर-दूर तक महसूस किए गए। स्थानीय समाचार माध्यमों के अनुसार भूकंप का सबसे अधिक प्रभाव मध्य सुलावेसी प्रांत के कई हिस्सों में देखा गया। विशेष रूप से पालू, सिगी, डोंगला तथा तोजो ऊना-ऊना क्षेत्रों में लोगों ने तेज झटकों का अनुभव किया। कई स्थानों पर लोग अपने घरों, कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में पहुंच गए। भूकंप के बाद कुछ समय तक लोगों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल बना रहा। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने तुरंत स्थिति की निगरानी शुरू कर दी। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में टीमों को भेजकर स्थिति का आकलन करना शुरू किया है। फिलहाल किसी बड़े संरचनात्मक नुकसान, भवन गिरने अथवा जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। भूकंप के बाद तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच सुनामी की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसियों और मौसम विभाग ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं पाया गया है। इसलिए सुनामी संबंधी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई। इसके बावजूद कई तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने एहतियात के तौर पर समुद्र तट से दूर सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया। विशेषज्ञों का कहना है कि इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यह देश प्रशांत महासागर के उस क्षेत्र में स्थित है जिसे “रिंग ऑफ फायर” अर्थात “अग्नि वलय” कहा जाता है। यह क्षेत्र कई सक्रिय विवर्तनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित है, जिसके कारण यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं। इसी वजह से इंडोनेशिया में समय-समय पर शक्तिशाली भूकंप दर्ज किए जाते हैं। भूकंप के बाद आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। प्रशासन ने नागरिकों को सलाह दी है कि यदि बाद में झटके महसूस हों तो वे तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और सरकारी निर्देशों का पालन करें। साथ ही इमारतों की संरचनात्मक स्थिति की जांच किए बिना उनमें प्रवेश न करने की भी सलाह दी गई है। यह घटना जून महीने में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दर्ज हुआ दूसरा बड़ा भूकंप माना जा रहा है। इससे पहले 8 जून को फिलीपींस में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी थी। लगातार आ रहे भूकंपीय झटकों ने विशेषज्ञों को भी सतर्क कर दिया है और क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। भूकंप के बाद राहत एवं बचाव एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं। विभिन्न जिलों में स्थानीय प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और सार्वजनिक सुविधाओं की भी समीक्षा की जा रही है ताकि किसी संभावित समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, फिर भी प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी सतर्कता बरत रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों तक हल्के झटकों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी गई है। इंडोनेशिया में आए इस शक्तिशाली भूकंप ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। राहत की बात यह है कि समय रहते लोगों ने सावधानी बरती और अब तक किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।

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