दिल्ली का वादा पटना में टूटा.. बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों के खिलाफ मास अरेस्टिंग अभियान जारी..नड्डा ने किया था केस वापसी का वादा..

पटना। दिल्ली में आंदोलन खत्म होने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने सार्वजनिक तौर पर आश्वासन दिया था कि आंदोलनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी। लेकिन बिहार में तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यहां आंदोलनकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी अभियान चलाया जा रहा है, जिससे सरकार के वादों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, बिहार बंद के बाद अब तक 500 से अधिक आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें सबसे अधिक 258 गिरफ्तारियां पटना से हुई हैं। आरोप है कि पुलिस सोशल मीडिया पर तस्वीरें जारी कर प्रदर्शनकारियों की पहचान कर रही है और हजारों लोगों को गिरफ्तार करने की तैयारी में जुटी है।

बीती रात पटना में बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों को पुलिस वैन में भरकर न्यायिक दंडाधिकारी के आवास ले जाया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह कार्रवाई बिहार बंद के दौरान दर्ज मामलों के आधार पर की जा रही है।

विपक्ष और आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में बंद और प्रदर्शन नई बात नहीं हैं, लेकिन इस बार जिस तरह “मास अरेस्टिंग” अभियान चलाया जा रहा है, वह अभूतपूर्व है। उनका आरोप है कि सरकार आंदोलन को लोकतांत्रिक विरोध के बजाय कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाकर कठोर कार्रवाई कर रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि दिल्ली में आंदोलनकारियों को राहत देने का वादा किया गया था, तो बिहार में उसी आंदोलन से जुड़े लोगों पर इतनी सख्त कार्रवाई क्यों हो रही है? क्या बिहार सरकार केंद्र के आश्वासन से अलग रास्ते पर चल रही है, या फिर विरोध की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है?

इधर, आंदोलनकारियों के समर्थन में दिल्ली के जेन जी आंदोलन की नेता नेहा बोरा आज पटना पहुंच रही हैं। बताया जा रहा है कि वह गिरफ्तार आंदोलनकारियों के परिजनों और समर्थकों से मुलाकात करेंगी तथा सरकार की कार्रवाई के खिलाफ अपनी रणनीति का ऐलान कर सकती हैं।

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