पटना में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली संकट गहराया, ट्रिपिंग से लाखों उपभोक्ता परेशान
- बिजली खपत 700 मेगावाट के पार, पीक समय में बार-बार आपूर्ति बाधित
- ट्रांसफॉर्मर टैगिंग अधूरी, स्मार्ट मीटर के बावजूद लोड प्रबंधन में बड़ी कमी
पटना। राजधानी पटना में गर्मी बढ़ते ही बिजली व्यवस्था चरमराने लगी है। शहर में बिजली की खपत 700 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है, जिसके कारण शाम होते ही पीक समय में बिजली ट्रिपिंग की समस्या आम हो गई है। दीघा से लेकर पटना सिटी और कंकड़बाग से लेकर दानापुर तक के लाखों उपभोक्ता लगातार बिजली के आने-जाने से परेशान हैं। स्थिति यह है कि लोग बिजली कंपनी के हेल्पलाइन नंबर 1912 और फ्यूज कॉल केंद्रों पर शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है। बिजली आपूर्ति से जुड़ी एजेंसी पेसू के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही एयर कंडीशनर और कूलर के उपयोग में तेजी आई है, जिससे विद्युत फीडरों पर अचानक भार बढ़ गया है। इस अतिरिक्त दबाव के कारण ट्रांसफॉर्मर और लाइनें ओवरलोड हो रही हैं, जिससे बार-बार ट्रिपिंग की समस्या उत्पन्न हो रही है। हालांकि, इस समस्या के पीछे केवल बढ़ती मांग ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही भी एक बड़ा कारण बनकर सामने आई है। मुख्यालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद उपभोक्ताओं की डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर से टैगिंग का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को संबंधित ट्रांसफॉर्मर से जोड़ा जाना था, ताकि यह पता चल सके कि किस क्षेत्र में कितना लोड है और उसे कैसे संतुलित किया जाए। लेकिन यह काम अधूरा रहने के कारण इंजीनियरों को वास्तविक समय में लोड की जानकारी नहीं मिल पा रही है। पेसू क्षेत्र में कुल 7.59 लाख उपभोक्ता हैं, जिनमें से 6.72 लाख घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद केवल 3.56 लाख उपभोक्ताओं की ही ट्रांसफॉर्मर से टैगिंग हो पाई है। यानी आधे से अधिक उपभोक्ताओं का डेटा अभी भी उपलब्ध नहीं है। इस कारण कार्यपालक अभियंताओं के पास लोड प्रबंधन के लिए कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। बिजली कंपनी ने इस टैगिंग प्रक्रिया को 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, ताकि सॉफ्टवेयर के माध्यम से वास्तविक समय में लोड की निगरानी की जा सके। इस प्रणाली के तहत यदि किसी ट्रांसफॉर्मर पर अधिक भार होता है, तो उपभोक्ताओं को दूसरे ट्रांसफॉर्मर से जोड़ा जा सकता है या नया ट्रांसफॉर्मर लगाया जा सकता है। लेकिन टैगिंग अधूरी रहने के कारण यह पूरी योजना कागजों तक ही सीमित रह गई है। परिणामस्वरूप, कई क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड हो रहे हैं और बार-बार ट्रिप कर रहे हैं। इसके साथ ही वोल्टेज में उतार-चढ़ाव यानी फ्लक्चुएशन की समस्या भी बनी हुई है, जिससे घरेलू उपकरणों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। स्थिति को और जटिल बनाता है कि शहर में अभी भी लगभग 86,955 उपभोक्ताओं के यहां पुराने पोस्टपेड मीटर लगे हुए हैं। जब तक इन घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगाए जाएंगे, तब तक टैगिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकेगी। इस संबंध में बिजली कंपनी ने मीटर लगाने वाली एजेंसी ईडीएफ को निर्देश दिया है कि वे ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान कर जल्द से जल्द मीटर बदलने की प्रक्रिया पूरी करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के साथ बिजली संकट और गहरा सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह टैगिंग कार्य को प्राथमिकता देते हुए जल्द पूरा कराए और अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर लगाने जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। पटना में बिजली संकट केवल बढ़ती खपत का परिणाम नहीं है, बल्कि अधूरी योजना और प्रबंधन की कमी का भी नतीजा है। यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आम जनता को आने वाले दिनों में और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


