बिना MLA-MLC बने दोबारा मंत्री कैसे? उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, बढ़ीं मुश्किलें!
नई दिल्ली/पटना। बिहार की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और नीतिगत ख़बर सामने आ रही है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश कुशवाहा की कुर्सी पर अब कानूनी संकट मंडराने लगा है। बिना किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य रहे उन्हें दोबारा मंत्री बनाए जाने के फैसले को सु्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह ने शीर्ष अदालत में एक रिट याचिका दायर कर इस नियुक्ति को सीधे तौर पर असंवैधानिक करार दिया है। अधिवक्ता सान्या कौशल के माध्यम से दायर की गई इस याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश की दोबारा नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 164(4) का खुला उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि मंत्री दीपक प्रकाश से पूछा जाए कि वे किस कानूनी और संवैधानिक आधार पर इस पद पर बने हुए हैं। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई भी गैर-विधायक व्यक्ति अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य निर्वाचित होना अनिवार्य है। याचिका में दीपक प्रकाश के मंत्री कार्यकाल का पूरा ब्यौरा देते हुए कहा गया है कि सरकार ने इस संवैधानिक नियम को बाईपास करने की कोशिश की है। दीपक प्रकाश को सबसे पहले 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार में पंचायती राज मंत्री बनाया गया था। वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, इसलिए उनकी 6 महीने की समय सीमा 19 मई 2026 के आसपास खत्म हो रही थी। अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद वह कैबिनेट भंग हो गई थी। इसके बाद 7 मई 2026 को नवगठित सम्राट चौधरी कैबिनेट में दीपक प्रकाश को एक बार फिर से पंचायती राज मंत्री पद की शपथ दिला दी गई। याचिका में साफ कहा गया है कि सरकार महज कुछ दिनों का अंतराल (Gap) दिखाकर किसी व्यक्ति को बिना चुनाव जीते दोबारा मंत्री नहीं बना सकती। यह कार्यपालिका की शक्तियों का दुरुपयोग है और संसदीय लोकतंत्र व संवैधानिक जवाबदेही के सिद्धांतों के खिलाफ है।


