ईरान परमाणु मुद्दे पर समझौते की संभावना, इस्लामाबाद जाने को तैयार ट्रंप
- अमेरिका-ईरान युद्धविराम बढ़ाने के संकेत, पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर जोर
- यूरेनियम सौंपने पर सहमति का दावा, वार्ता में अब भी कई मुद्दों पर मतभेद
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा बयान देते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि यदि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए कोई समझौता होता है और उस पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो वह स्वयं वहां जाने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के नेता उन्हें आमंत्रित करना चाहते हैं और वहां उनके प्रति सकारात्मक भावना है। ट्रंप ने यह बयान उस समय दिया जब वे नेवादा और एरिजोना की यात्रा पर रवाना हो रहे थे और व्हाइट हाउस परिसर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम को आगे बढ़ाने की संभावना जताई। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संभव है कि इसकी आवश्यकता ही न पड़े, यदि दोनों देशों के बीच कोई स्थायी समाधान निकल आता है। अपने बयान में ट्रंप ने पाकिस्तान की भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए उन्हें सक्षम और सकारात्मक नेतृत्व वाला बताया। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में मध्यस्थ के रूप में बहुत अच्छा कार्य किया है और उसकी भूमिका रचनात्मक रही है। दरअसल, पाकिस्तान पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता कराने के प्रयासों में सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। इसी क्रम में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर हाल ही में ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ से मुलाकात की। इस मुलाकात का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वार्ता को आगे बढ़ाना और संभावित समझौते के लिए वातावरण तैयार करना था। इससे पहले भी बीते सप्ताह इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत हुई थी। अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था, जबकि ईरान की ओर से वरिष्ठ राजनयिक अब्बास अराघची शामिल हुए थे। हालांकि इस वार्ता में कोई ठोस समझौता नहीं हो सका और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने रहे। सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बना रहा है, जबकि ईरान इस मुद्दे पर समझौता करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है। विशेष रूप से परमाणु ईंधन के रूप में उपयोग होने वाले संवर्धित यूरेनियम के उत्पादन और भंडारण को लेकर दोनों देशों के बीच गहरी असहमति बनी हुई है। हालांकि ट्रंप ने गुरुवार रात एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान संवर्धित यूरेनियम को सौंपने के लिए सहमत हो गया है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी। लेकिन अभी तक इस संबंध में ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो यह पाकिस्तान के लिए भी एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि होगी। साथ ही, ट्रंप का वहां जाना इस समझौते को और अधिक वैश्विक महत्व प्रदान कर सकता है। अमेरिका-ईरान संबंधों में जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम एक नए मोड़ की ओर इशारा कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वास्तव में कोई स्थायी समझौता संभव हो पाता है या नहीं।


