टीपीएस कॉलेज में प्रेम यूथ फाउंडेशन का वॉलेंट्रीयरशिप आरंभ
पटना। टी.पी.एस. कॉलेज, पटना में गुरुवार को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व, सामुदायिक सहभागिता तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र में महाविद्यालय एवं प्रेम यूथ फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वॉलंटियरशिप ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया गया, जबकि द्वितीय सत्र में वनस्पति विज्ञान विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में औषधीय पौधों के संग्रहण, सुखाने, निष्कर्षण, सॉल्वेंट चयन एवं फाइटोकेमिकल स्क्रीनिंग विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। वॉलंटियरशिप ओरिएंटेशन प्रोग्राम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने की। कार्यक्रम में श्री कपिल देव राम, राज्य निदेशक, मेरा युवा भारत (युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार), श्री विनय कुमार, क्षेत्रीय निदेशक, राष्ट्रीय सेवा योजना, बिहार तथा डॉ. मोहम्मद अली, इंटर्नशिप समन्वयक, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत वॉलंटियरशिप को स्नातक चतुर्थ सेमेस्टर में अनिवार्य किए जाने का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता तथा सेवा-भावना का विकास करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना का आधार है। उन्होंने भारतीय शिक्षा परंपरा, नालंदा एवं तक्षशिला विश्वविद्यालयों की गौरवशाली विरासत, गुरुकुल शिक्षा पद्धति, “वसुधैव कुटुम्बकम्” की अवधारणा, मैकाले की शिक्षा व्यवस्था तथा कोठारी आयोग की अनुशंसाओं का उल्लेख करते हुए प्राचीन और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर बल दिया। विनय कुमार ने कहा कि वॉलंटियरशिप युवाओं में नेतृत्व, अनुशासन, टीम भावना और सामाजिक प्रतिबद्धता का विकास करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का स्वागत करते हुए डॉ. हंस कुमार सिंह, एनईपी समन्वयक, टी.पी.एस. कॉलेज ने कहा कि वॉलंटियरशिप विद्यार्थियों को समाज के साथ जुड़कर सीखने तथा अपने व्यक्तित्व को निखारने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। द्वितीय सत्र में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य, प्राचार्य, टी.पी.एस. कॉलेज, पटना द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. विनोद कुमार, प्राचार्य, आर.एम.डब्ल्यू. कॉलेज, नवादा तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. चंदन, सवेरा कैंसर हॉस्पिटल थे। कार्यशाला में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय तथा बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के शोधार्थियों सहित कुल 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को औषधीय पौधों के वैज्ञानिक संग्रहण, सुखाने, निष्कर्षण, सॉल्वेंट चयन तथा फाइटोकेमिकल स्क्रीनिंग की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। डॉ. विनय भूषण कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की समृद्ध वनौषधीय परंपरा को वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर स्वास्थ्य, औषधि निर्माण तथा जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं का सृजन किया जा सकता है। उन्होंने शोधार्थियों से प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान को समाजोपयोगी नवाचारों से जोड़ने का आह्वान किया। अपने संबोधन में प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि औषधीय पौधों पर आधारित अनुसंधान भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं डॉ. चंदन ने पारंपरिक औषधीय ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के मंच पर डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. मुकुंद कुमार तथा डॉ. रवि प्रभाकर उपस्थित थे। कार्यक्रम में डॉ. अवनीत भूषण, डॉ. अंकित कुमार, शिवम पराशर, चंदन कुमार, दीपक मंडल, हृदय नारायण झा, अविनाश शर्मा, दिलीप कुमार एवं प्रेम कुमार सहित महाविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


