मिड-डे मील मामले में पटना हाईकोर्ट सख्त, फॉरेंसिक जांच में देरी पर जताई नाराजगी
- सहरसा के विद्यालय में भोजन खाने के बाद 189 बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले में अधिकारियों से मांगा विस्तृत जवाब
- फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश, 18 जून को होगी अगली सुनवाई
पटना। सहरसा जिले के महिषी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, बलुआहा में मध्याह्न भोजन खाने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों के बीमार पड़ने के मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय ने एक बार फिर गंभीर रुख अपनाया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए बिहार सरकार और संबंधित अधिकारियों से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे तथा जांच प्रक्रिया में हुई देरी पर नाराजगी भी जताई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। सुनवाई के दौरान न्यायालय बिहार सरकार की ओर से मध्याह्न भोजन एवं प्रधानमंत्री पोषण योजना के निदेशक द्वारा प्रस्तुत जवाब से संतुष्ट नहीं दिखाई दिया। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी पक्षों से विचार-विमर्श कर विस्तृत और अद्यतन शपथ-पत्र दाखिल करें। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने भागलपुर स्थित क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने इस बात पर आश्चर्य और नाराजगी व्यक्त की कि इतने गंभीर मामले में, जहां 189 छात्रों का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ, वहां भोजन के नमूनों की जांच समय पर नहीं की गई। अदालत ने कहा कि यदि जांच में देरी होती है तो सच्चाई तक पहुंचना कठिन हो जाता है और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय नहीं हो पाती। न्यायालय ने फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, भागलपुर के निदेशक को अगली सुनवाई में ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस संबंध में 21 मई 2026 को ही प्रयोगशाला को पत्र भेजा गया था। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। मामले की सुनवाई के दौरान सहरसा पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई। अदालत को बताया गया कि जांच अधिकारी द्वारा भोजन के नमूनों को परीक्षण के लिए भेजने में विलंब किया गया था। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए संबंधित जांच अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि निलंबन और विभागीय कार्रवाई से संबंधित पूरी जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए। गौरतलब है कि यह मामला उस समय सामने आया था जब महिषी प्रखंड के राजकीय मध्य विद्यालय, बलुआहा में मध्याह्न भोजन खाने के बाद 150 से अधिक छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की थी। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल और बाद में सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला प्रशासन के अनुसार कुल 189 बच्चों का उपचार किया गया और स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई थी कि भोजन में सांप का बच्चा या कोई जहरीला कीड़ा गिर गया था, जिसके कारण बच्चे बीमार पड़े। घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल भोजन के नमूने जांच के लिए भेजे और विद्यालय के प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया। साथ ही प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि महिषी प्रखंड के 68 विद्यालयों में विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से रसोई संचालन की व्यवस्था है, जबकि 58 विद्यालयों में यह कार्य बाहरी एजेंसियों के जरिए कराया जाता है। न्यायालय ने इस व्यवस्था की भी समीक्षा करने के संकेत दिए हैं। अदालत ने सहरसा के खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी, खाद्य विश्लेषक तथा संबंधित गैर-सरकारी संस्था से भी रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही भारतरत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। मध्याह्न भोजन योजना राज्य के लाखों बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में इस घटना ने योजना की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और न्यायालय के आगामी निर्देशों पर टिकी हुई हैं।


