शिक्षा को जाति और धर्म में बांटने की राजनीति बंद हो, पटना पुलिस निष्पक्ष जांच करे: बबलू प्रकाश
- कदमकुआं कांड संख्या 460/2021 से वर्तमान विवाद तक: पटना पुलिस निष्पक्ष जांच करे, छात्रों को नफरत की राजनीति से दूर रखें: बबलू प्रकाश
पटना। आम आदमी पार्टी के कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता बबलू प्रकाश ने बिहार के चर्चित शिक्षकों खान सर और रौशन आनंद के बीच चल रहे विवाद पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र को विवाद, जातीय ध्रुवीकरण और धार्मिक नफरत का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। बबलू प्रकाश ने कहा कि खान सर और रौशन आनंद दोनों ने लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दोनों शिक्षकों की पहचान उनके ज्ञान, शिक्षण कौशल और विद्यार्थियों की सफलता से है, न कि उनकी जाति या धर्म से। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग खान सर को मुसलमान और रौशन आनंद को यादव बताकर छात्रों और समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षक की पहचान उसकी जाति, धर्म या समुदाय नहीं, बल्कि उसका ज्ञान और चरित्र होता है। बबलू प्रकाश ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2021 में भी खान सर द्वारा कदमकुआं थाना, पटना में कांड संख्या 460/2021 दर्ज कराते हुए रौशन आनंद एवं अन्य लोगों पर मारपीट, हंगामा और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। इससे स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद और विवाद कोई नया विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान घटनाक्रम को देखते हुए पटना पुलिस को पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और पेशेवर तरीके से जांच करनी चाहिए। किसी भी पक्ष के प्रभाव, लोकप्रियता या सोशल मीडिया दबाव से ऊपर उठकर केवल तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। बबलू प्रकाश ने दोनों शिक्षकों से भी विनम्र आग्रह किया कि वे आपसी टकराव, आरोप-प्रत्यारोप और सार्वजनिक विवादों को समाप्त करें। लाखों छात्र उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। जब शिक्षक आपस में संघर्ष करते हैं, तो उसका नकारात्मक प्रभाव छात्रों और अभिभावकों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज बिहार के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और मार्गदर्शन की आवश्यकता है, न कि शिक्षकों के बीच विवाद की। अंत में उन्होंने छात्रों एवं अभिभावकों से अपील की कि वे किसी भी शिक्षक को जाति और धर्म के चश्मे से न देखें तथा सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे नफरतपूर्ण और भ्रामक संदेशों से दूर रहें। गुरु की कोई जाति नहीं होती, ज्ञान का कोई धर्म नहीं होता। बिहार को विवाद नहीं, विद्या चाहिए।


