उत्तराखंड में पीपलकोटी की निर्माणाधीन सुरंग में बड़ा हादसा, 7 श्रमिकों की मौत; तीन अब भी फंसे
- पानी और मलबा भरने से बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण, 14 घायल श्रमिक अस्पताल में भर्ती; राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और सेना की टीमें जुटीं
- सीएम धामी ने घटनास्थल पहुंचकर बचाव कार्य का लिया जायजा, सभी श्रमिकों को सुरक्षित निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
देहरादून/चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। सुरंग के भीतर अचानक पानी और मलबा आने के बाद वहां काम कर रहे श्रमिक फंस गए। हादसे में अब तक सात श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि तीन श्रमिकों के अभी भी सुरंग के भीतर फंसे होने की सूचना है। 14 घायल श्रमिकों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। बचाव अभियान लगातार जारी है और सुरंग के भीतर पानी व मलबा होने के कारण राहत दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। घटना पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार, 13 अगस्त की शाम करीब सात बजे हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सुरंग के भीतर अचानक पानी का रिसाव बढ़ गया और इसके साथ मलबा आने लगा। देखते ही देखते सुरंग का एक हिस्सा प्रभावित हो गया और वहां काम कर रहे श्रमिकों के सामने बाहर निकलने की चुनौती पैदा हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत दलों को सक्रिय किया गया। बचाव दल ने अभियान चलाकर कई श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकाला। घायलों को तत्काल गोपेश्वर के जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में 13 घायल श्रमिकों का उपचार चल रहा है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर स्थित उच्च चिकित्सा केंद्र भेजा गया है। हादसे में मृत श्रमिकों की संख्या सात बताई गई है। सुरंग के भीतर पानी और मलबा लगातार बचाव अभियान के लिए चुनौती बना हुआ है। राहत दलों को प्रभावित हिस्से तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। फंसे हुए तीन श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विभिन्न एजेंसियां संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सेना, दमकल और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं। गौचर और जोशीमठ से अतिरिक्त बचाव दल और उपकरण भी घटनास्थल तक पहुंचाए गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में सुरक्षा और बचावकर्मियों को लगाया गया है। पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, दमकल तथा अन्य एजेंसियों के जवान सुरंग के आसपास लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों की निगरानी में सुरंग के भीतर पानी और मलबा हटाने तथा सुरक्षित रास्ता तैयार करने की कोशिश की जा रही है। बचाव अभियान की प्राथमिकता फंसे हुए श्रमिकों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पीपलकोटी पहुंच चुके हैं। उन्होंने घटनास्थल पर पहुंचकर सुरंग में चल रहे राहत और बचाव अभियान का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने बचाव एजेंसियों के अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरंग में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री इसके बाद अस्पताल जाकर घायल श्रमिकों से भी मुलाकात कर उनका हाल जानने वाले हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार हादसे के समय सुरंग में कुल 22 लोगों के काम करने की जानकारी थी। इनमें से अधिकांश लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। कुछ श्रमिकों की मौत हुई है, जबकि घायल श्रमिकों का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। अंदर फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए बचाव एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं। केंद्र सरकार की ओर से भी राज्य को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। पीपलकोटी की यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माणाधीन सुरंगों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। पानी का अचानक प्रवेश और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक घटनाएं ऐसे निर्माण कार्यों के लिए बड़ा जोखिम पैदा करती हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और बचाव अभियान पर है। सुरंग के भीतर फंसे तीन श्रमिकों को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। बचाव अभियान पूरा होने और सुरंग की स्थिति सामान्य होने के बाद हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। फिलहाल राहत दल सुरंग के भीतर मौजूद पानी और मलबे को हटाने के साथ फंसे श्रमिकों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। चमोली प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है।


