पीएमसीएच में एसी में लगी आग, कर्मचारियों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
- शॉर्ट सर्किट के कारण ऑपरेशन कक्ष में फैला धुआं, तत्काल कार्रवाई से सुरक्षित रहे मरीज और स्वास्थ्यकर्मी
- पुरानी विद्युत व्यवस्था पर उठे सवाल, अस्पताल प्रशासन ने शुरू की सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा
पटना। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के राजेंद्र शल्य चिकित्सा ब्लॉक में बुधवार को एक संभावित बड़ा हादसा उस समय टल गया, जब दूसरे तल पर स्थित एक ऑपरेशन कक्ष में लगे वातानुकूलन यंत्र में अचानक आग लग गई। शॉर्ट सर्किट के कारण उत्पन्न इस घटना से कुछ समय के लिए पूरे परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया, लेकिन अस्पताल कर्मचारियों और तकनीकी दल की तत्परता के कारण स्थिति पर शीघ्र नियंत्रण पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी मरीज, चिकित्सक या कर्मचारी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। घटना राजेंद्र शल्य चिकित्सा ब्लॉक के दूसरे तल पर स्थित ऑपरेशन कक्ष संख्या-3 में हुई। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन कक्ष में लगे वातानुकूलन यंत्र से अचानक धुआं निकलना शुरू हुआ। कुछ ही क्षणों में धुआं पूरे कक्ष और आसपास के हिस्सों में फैल गया। धुएं और चिंगारियों को देखकर वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने तुरंत इसकी सूचना अस्पताल प्रशासन को दी। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण विद्युत शॉर्ट सर्किट बताया गया है। धुआं फैलने के कारण मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत प्रभावित हिस्से की विद्युत आपूर्ति बंद करवा दी। इसके साथ ही तकनीकी दल और कर्मचारियों ने मिलकर आग को नियंत्रित करने का कार्य शुरू किया। समय रहते उठाए गए कदमों के कारण आग अन्य हिस्सों में फैलने से पहले ही बुझा दी गई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि घटना के दौरान चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया। अन्य ऑपरेशन कक्षों में निर्धारित शल्य प्रक्रियाएं सामान्य रूप से चलती रहीं और मरीजों की देखभाल में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई। सभी मरीज पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा किसी को स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि ऑपरेशन कक्ष संख्या-3 के वातानुकूलन यंत्र में तकनीकी खराबी आने के कारण धुआं उत्पन्न हुआ था। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में कर लिया। उनके अनुसार कुछ ही समय में व्यवस्था सामान्य कर दी गई और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि इस घटना ने अस्पताल की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों और अस्पताल से जुड़े लोगों का कहना है कि राजेंद्र शल्य चिकित्सा ब्लॉक काफी पुराना भवन है, जहां लंबे समय से व्यापक स्तर पर विद्युत तारों का नवीनीकरण नहीं कराया गया है। भवन के कई हिस्सों में पुराने और जर्जर तार अब भी मौजूद हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने की आशंका बनी रहती है। सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर विद्युत तार खुले और लटके हुए दिखाई देते हैं। कर्मचारियों का मानना है कि यदि समय रहते विद्युत व्यवस्था का आधुनिकीकरण नहीं किया गया तो भविष्य में इससे भी गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में विद्युत सुरक्षा की अनदेखी बड़े जोखिम को जन्म दे सकती है। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरे परिसर की विद्युत और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञों को भवन की वायरिंग, विद्युत उपकरणों और सुरक्षा प्रणालियों की जांच का निर्देश दिया गया है। साथ ही अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता और आपातकालीन व्यवस्था का भी परीक्षण किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में नियमित विद्युत परीक्षण, अग्नि सुरक्षा अभ्यास और पुरानी वायरिंग का समय-समय पर प्रतिस्थापन अत्यंत आवश्यक है। चिकित्सा संस्थानों में बड़ी संख्या में मरीज, जीवनरक्षक उपकरण और संवेदनशील चिकित्सा प्रक्रियाएं संचालित होती हैं, इसलिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। यह घटना भले ही बिना किसी नुकसान के समाप्त हो गई, लेकिन इसने स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा तैयारियों और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। कर्मचारियों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया, किंतु भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और स्थायी उपाय करना समय की मांग है।


