August 20, 2026

गया के जंगल में नक्सलियों के हथियारों का जखीरा बरामद, एके-47 की मैगजीन और पांच कारतूस जब्त

  • घाटी में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने चलाया सर्च ऑपरेशन
  • गुप्त सूचना के बाद विशेष दल की कार्रवाई, नक्सली गतिविधियों पर अंकुश के लिए इलाके में जांच अभियान जारी

गया। बिहार के गया जिले में सुरक्षा बलों को नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान महत्वपूर्ण सफलता मिली है। छकरबंधा थाना क्षेत्र के पिच्छुलिया मोड़, बरहा घाटी स्थित जंगली इलाके से नक्सलियों द्वारा कथित रूप से छिपाकर रखा गया एके-47 राइफल का एक मैगजीन, पांच जिंदा कारतूस और एक खाली खोखा बरामद किया गया है। बरामदगी के बाद पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, गया पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि छकरबंधा थाना क्षेत्र के पिच्छुलिया मोड़ के आसपास स्थित घने जंगल में नक्सली संगठन से जुड़े लोगों ने हथियार और गोला-बारूद छिपाकर रखा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और एक विशेष दल का गठन किया गया। इस विशेष दल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जिला पुलिस के जवानों को शामिल किया गया। संयुक्त सुरक्षा दल को नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने और संदिग्ध स्थानों की गहन जांच के लिए जंगली इलाके में भेजा गया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने पिच्छुलिया मोड़ और बरहा घाटी के आसपास के क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने जंगल के एक स्थान से एके-47 राइफल का एक मैगजीन बरामद किया। इसके साथ ही पांच जिंदा कारतूस और एक खाली खोखा भी मिला। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में बरामद सामान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे जाने की आशंका जताई जा रही है। बरामदगी के बाद छकरबंधा थाना में कांड संख्या 31/26 दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियारों और कारतूस को कब और किस उद्देश्य से जंगल में छिपाया गया था। जांच एजेंसियां बरामद सामग्री से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि पुलिस को नक्सलियों द्वारा हथियार छिपाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद विशेष दल का गठन कर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जिला पुलिस के जवानों को संयुक्त रूप से कार्रवाई के लिए भेजा गया। उन्होंने बताया कि पिच्छुलिया के जंगली क्षेत्र में गहन तलाशी अभियान के दौरान एके-47 राइफल का एक मैगजीन, पांच जिंदा कारतूस और एक खाली खोखा बरामद किया गया है। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और आगे की जांच जारी है। छकरबंधा और इसके आसपास का जंगली इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के कारण यहां सुरक्षा बलों को अभियान चलाने में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। इसी कारण पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल समय-समय पर संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चलाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सुरक्षा बलों की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है। गुप्त सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध इलाकों में विशेष अभियान चलाकर हथियारों और अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों की तलाश की जाती है। इस बरामदगी को सुरक्षा बलों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि केवल हथियारों और कारतूस की बरामदगी के आधार पर जांच को समाप्त नहीं किया जाएगा। इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि हथियारों का इस्तेमाल किसी संभावित घटना में किया जाना था या फिर इन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित स्थान पर छिपाकर रखा गया था। पुलिस बरामद सामग्री की तकनीकी और वैज्ञानिक जांच भी कर सकती है। इससे यह जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाएगा कि कारतूस और खोखे का संबंध किसी पूर्व घटना से है या नहीं। साथ ही सुरक्षा एजेंसियां इलाके में सक्रिय या पहले सक्रिय रहे नक्सली संगठनों के संबंध में भी जानकारी एकत्र कर रही हैं। बरामदगी के बाद पिच्छुलिया मोड़ और बरहा घाटी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और सतर्क कर दी गई है। पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम इलाके में लगातार तलाशी अभियान चला रही है। जंगल के अन्य हिस्सों में भी संदिग्ध स्थानों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नक्सली गतिविधियों से संबंधित किसी भी विश्वसनीय सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा बलों की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना तथा नक्सली संगठनों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। फिलहाल, छकरबंधा थाना क्षेत्र में बरामद एके-47 का मैगजीन, पांच जिंदा कारतूस और एक खाली खोखा पुलिस के लिए जांच का महत्वपूर्ण आधार बन गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन हथियारों को किसने और कब जंगल में छिपाया था तथा इनके पीछे नक्सलियों की क्या योजना थी। मामले में जांच और सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है।

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