भाजपा ने तीन राज्यों के प्रभारी बदले, विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश और सतीश पूनिया को पंजाब की जिम्मेदारी
- विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद, तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी बनाया गया
- नई राष्ट्रीय टीम के गठन के अगले दिन तीन राज्यों में बदलाव, चुनावी तैयारियों के साथ नए चेहरों को संगठन में मिली अहम जिम्मेदारी
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारियों को गति देते हुए मंगलवार को तीन राज्यों के नए प्रभारियों की घोषणा की। पार्टी ने विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया है। तीनों राज्यों की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए इन नियुक्तियों को पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। तावड़े वर्तमान में राज्यसभा सदस्य होने के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री भी हैं। संगठन के स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले तावड़े को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है और यहां का चुनाव आगामी राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है। पार्टी ने सतीश पूनिया को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया है। पूनिया राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं। पंजाब में भी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने वाली हैं। ऐसे में संगठन के अनुभवी नेता को राज्य की जिम्मेदारी सौंपना पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा पंजाब में संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की दिशा में काम कर रही है। गुजरात का प्रभारी तरुण चुग को बनाया गया है। चुग राज्यसभा सदस्य होने के साथ भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। गुजरात भाजपा का मजबूत आधार वाला राज्य है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक तैयारी को और प्रभावी बनाने के लिए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश और पंजाब के बाद गुजरात में भी चुनावी गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। तीन राज्यों के नए प्रभारियों की घोषणा से एक दिन पहले सोमवार को भाजपा ने अपनी नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम का गठन किया था। पार्टी ने नई टीम में व्यापक बदलाव करते हुए कई नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व पदाधिकारी राम माधव को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। नई राष्ट्रीय टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने कुल 65 पदाधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इनमें 51 नए चेहरे शामिल हैं। भाजपा के अनुसार नई टीम में युवा नेताओं और महिलाओं को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है। 12 महिलाओं तथा अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े छह नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी मिली है। आयु वर्ग के लिहाज से भी नई टीम में युवाओं को स्थान दिया गया है। पार्टी के अनुसार छह पदाधिकारी 40 वर्ष से कम उम्र के हैं, जबकि 15 पदाधिकारी 40 से 49 वर्ष के बीच के हैं। 21 पदाधिकारी 50 से 59 वर्ष की आयु के हैं। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी ने संगठन में अनुभव के साथ नई पीढ़ी के नेताओं को भी आगे बढ़ाने की कोशिश की है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वह नई राष्ट्रीय टीम में शामिल होने वाले एकमात्र केंद्रीय मंत्री हैं। वहीं बीएल संतोष को राष्ट्रीय महामंत्री संगठन के पद पर बरकरार रखा गया है। यह पद भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और पार्टी के संगठन संचालन में इसकी अहम भूमिका होती है। भाजपा ने संगठन के प्रचार और सामाजिक माध्यम से जुड़े ढांचे में भी बदलाव किया है। अमित मालवीय को सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के प्रमुख पद से हटाकर उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह गुजरात के हेमांग जोशी को सांसद तेजस्वी सूर्या की जगह भारतीय जनता युवा मोर्चा का नया अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के अनुसार राष्ट्रीय संगठन में किए गए बदलाव का उद्देश्य आने वाले वर्षों में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 के आम चुनाव की तैयारियों को मजबूत करना है। तीन राज्यों के प्रभारी बदलने का फैसला भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में संगठन की स्थिति मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। नई नियुक्तियों के बाद अब इन राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और चुनावी तैयारियों को गति मिलने की उम्मीद है। नए प्रभारियों के सामने कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी चुनावों के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने की चुनौती होगी। भाजपा के लगातार संगठनात्मक बदलावों से स्पष्ट है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अभी से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गई है।


