September 13, 2026

बिहार राजनीति से बड़ी खबर: चुनाव के वक्त MLC सीट देने का था लिखित वादा? BJP और RLM का ‘समझौता पत्र’ सोशल मीडिया पर वायरल

पटना। बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव और मंत्री दीपक प्रकाश के भविष्य को लेकर मचे घमासान के बीच सूबे की सियासत में एक बड़ा भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच हुआ एक कथित “गुप्त समझौता पत्र” सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पत्र के सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि चुनाव के वक्त बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से विधान परिषद की एक सीट देने का वादा किया था, जिससे अब बीजेपी मुकरती हुई नजर आ रही है।

​आइए इस वायरल पत्र और इससे भड़की राजनीतिक चिंगारी को विस्तार से समझते हैं:

​क्या है वायरल पत्र में?

​सोशल मीडिया पर जो पत्र (प्रेस विज्ञप्ति) वायरल हुआ है, उस पर बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष के नाम से हस्ताक्षर हैं। इस पत्र में साफ तौर पर लिखा है:

​सीटों का गणित: बीजेपी और आरएलएम के राष्ट्रीय अध्यक्षों के बीच हुई वार्ता के अनुसार, राष्ट्रीय लोक मोर्चा बिहार विधानसभा चुनाव में 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

​लिखित वादा: इसके साथ ही, बिहार विधान परिषद (MLC) में 1 सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा को ‘भारतीय जनता पार्टी के हिस्से से’ दी जाएगी।

​क्यों भड़का विवाद? (दीपक प्रकाश का एंगल)

​इस पत्र के ऐन वक्त पर वायरल होने के पीछे उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश का मामला जुड़ा हुआ है।

​दीपक प्रकाश फिलहाल सरकार में मंत्री हैं, लेकिन वे किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं। मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें 6 महीने के भीतर सदस्य बनना अनिवार्य है।

​चालू एमएलसी चुनाव के नामांकन खत्म हो चुके हैं, लेकिन बीजेपी ने अपने कोटे से आरएलएम या दीपक प्रकाश को उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बाद से ही उपेंद्र कुशवाहा का दर्द और नाराजगी खुलकर सामने आ रही थी।

​अब इस वायरल पत्र के जरिए उपेंद्र कुशवाहा के समर्थकों ने बीजेपी को उसका ‘पुराना वादा’ याद दिलाते हुए मोर्चा खोल दिया है और इसे ‘वादाखिलाफी’ करार दिया है।

​अंदरूनी खटपट: विलय या किनारे लगने का दबाव?

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी और आरएलएम के बीच यह खटपट सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि वजूद की लड़ाई है:

​बीजेपी की शर्त: सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी चाहती है कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी (RLM) का पूर्ण रूप से बीजेपी में विलय (मर्जर) कर दें, क्योंकि बीजेपी के पास अब सम्राट चौधरी के रूप में बड़ा कोइरी (कुशवाहा) चेहरा मौजूद है।

​कुशवाहा की ना: उपेंद्र कुशवाहा ने हाल ही में कड़े तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पार्टी का अस्तित्व खत्म (मर्जर) नहीं करेंगे।

​विपक्ष को मिला हमला करने का मौका

​इस गुप्त समझौते के लीक होने के बाद मुख्य विपक्षी दल आरजेडी (RJD) और महागठबंधन को बीजेपी पर हमला करने का बड़ा हथियार मिल गया है। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी अपने छोटे सहयोगियों का इस्तेमाल केवल चुनाव जीतने के लिए करती है और बाद में उन्हें राजनीतिक रूप से ‘निगलने’ या किनारे लगाने का काम करती है।

​अब क्या होगा?

इस वायरल पत्र ने एनडीए के भीतर के शीत युद्ध (Cold War) को सरेआम कर दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि इस लिखित वादे के सार्वजनिक होने के बाद बीजेपी बैकफुट पर आकर उपेंद्र कुशवाहा को मनाने के लिए कोई नया रास्ता (जैसे भविष्य में कोई अन्य एडजस्टमेंट) निकालती है या फिर बिहार एनडीए में कोई नया बिखराव देखने को मिलता है।

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