August 19, 2026

प्रदेश में अब दंगा करने वालों की खैर नहीं….हर जिले में दंगा निरोधी फोर्स का होगा गठन, 40 कंपनियां रहेगी तनाव

  • 40 कंपनियों का होगा गठन, 20 मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना होगा विशेष दस्ता
  • साम्प्रदायिक तनाव, हिंसक प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित जवानों की होगी तैनाती

पटना। बिहार में विधि-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों में विशेष दंगा निरोधी बल गठित करने का फैसला लिया है। इसके तहत जिला दंगा निरोधी बल का गठन किया जाएगा, जो साम्प्रदायिक तनाव, हिंसक प्रदर्शन, सड़क जाम, सरकारी संपत्ति पर हमले, भीड़ नियंत्रण और अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई करेगा। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, सभी जिलों और अनुमंडल स्तर पर दंगा नियंत्रण इकाई बनाई जाएगी। विशेष दस्ते में प्रशिक्षित पुलिस पदाधिकारी और जवानों के अलावा महिला पुलिसकर्मी, चिकित्सा एवं एंबुलेंस सहायता दल, वीडियोग्राफी और घटनाओं के दस्तावेजीकरण के लिए कर्मी, संचार दल, रिजर्व बल और लाठी दस्ता शामिल रहेगा। इसका उद्देश्य किसी भी संवेदनशील स्थिति में अलग से बल जुटाने में लगने वाले समय को कम करना और स्थानीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। दंगा निरोधी बल की प्रत्येक कंपनी में तीन प्लाटून होंगी। प्रत्येक प्लाटून में आंसू गैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक और वायरलेस ऑपरेटर समेत कुल 47 कर्मी तैनात रहेंगे। प्रत्येक प्लाटून को दो वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें एक बस और एक ट्रक शामिल होगा। दस्ता प्रभारी अपने अधीन बल की तैनाती, अनुशासन, संचार व्यवस्था, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और कार्रवाई से जुड़े अभिलेखों के लिए जिम्मेदार होंगे। पूरे दस्ते की जिम्मेदारी पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) के पास रहेगी। पुलिस मुख्यालय ने जिलों को तीन श्रेणियों में बांटकर कुल 40 कंपनियों के गठन की योजना तैयार की है। इसके लिए कुल 294 वाहनों की व्यवस्था की जाएगी। अ श्रेणी में पटना को तीन कंपनियां मिलेंगी, जिसके लिए 18 वाहन उपलब्ध होंगे। गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और बेगूसराय को दो-दो कंपनियां दी जाएंगी। इन जिलों के लिए 12-12 वाहन उपलब्ध होंगे। ब श्रेणी में नालंदा, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, वैशाली, सीतामढ़ी, सिवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, बांका, मुंगेर, जमुई और खगड़िया को एक-एक कंपनी दी जाएगी। प्रत्येक जिले को छह वाहन मिलेंगे। स श्रेणी में अरवल, शिवहर, बगहा, लखीसराय, शेखपुरा और नवगछिया को एक-एक प्लाटून उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक प्लाटून के लिए दो वाहन दिए जाएंगे। इस व्यवस्था के जरिए संवेदनशीलता और स्थानीय जरूरत के आधार पर जिलों में बल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दंगा या हिंसक स्थिति की सूचना मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई के लिए समय सीमा भी तय की गई है। जिला नियंत्रण कक्ष से घटना की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों और दंगा निरोधी दस्ते को दी जाएगी। सूचना मिलने के बाद दस्ता 20 मिनट के भीतर निर्धारित घटनास्थल के लिए रवाना होगा। मौके पर पहुंचने के बाद बल वरीय पुलिस पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करेगा और स्थिति का लगातार आकलन करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करेगा। दंगा निरोधी बल में शामिल पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रत्येक जिले के पुलिस केंद्र में एक महीने का प्रशिक्षण आयोजित होगा। इसके लिए पुलिस निरीक्षक, सार्जेंट मेजर, पुलिस अवर निरीक्षक, सार्जेंट और सहायक अवर निरीक्षक स्तर के प्रशिक्षकों का चयन किया जाएगा। चयनित प्रशिक्षकों को मेरठ स्थित रैपिड एक्शन फोर्स अकादमी फॉर पब्लिक ऑर्डर में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद वे अपने-अपने जिलों में दंगा निरोधी बल के जवानों को विशेष प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में भीड़ नियंत्रण, संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने, सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल और समन्वित कार्रवाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जवानों की तैयारी लगातार बनी रहे, इसके लिए प्रत्येक तीन महीने में हर प्लाटून का एक सप्ताह का पुनश्चर्या प्रशिक्षण कराया जाएगा। यह प्रशिक्षण क्रमवार तरीके से पुलिस केंद्र में पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) के नेतृत्व में आयोजित होगा। वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में दंगा निरोधी बल के लिए प्रशिक्षण, साजो-सामान, सुरक्षा उपकरण, आवासन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेंगे। वहीं क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद संवेदनशील परिस्थितियों में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

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