झारखंड में 45 भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा फैसला, 39 रद्द और 6 अगले आदेश तक स्थगित
- छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने माना अनियमितताओं पर कार्रवाई जरूरी, जेपीएससी-जेएसएससी में सुधार की तैयारी
- डिप्टी कलेक्टर, सहायक प्राध्यापक, सिविल जज और सीजीएल समेत कई पुरानी परीक्षाएं भी रद्द
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। छात्र संगठनों की मांगों पर सरकार की ओर से कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। मंगलवार देर रात जारी अलग-अलग आठ अधिसूचनाओं के माध्यम से 45 भर्ती परीक्षाओं पर निर्णय लिया गया। इनमें 39 परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है, जबकि छह परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित रखा गया है। सरकार का यह फैसला झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितता और कदाचार को लेकर चल रही अपराध अनुसंधान विभाग तथा विशेष जांच दल की जांच के बीच आया है। सरकार ने जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर इन परीक्षाओं को रद्द या स्थगित करने का निर्णय लिया है।
कई बड़े पदों की भर्ती परीक्षाएं रद्द
रद्द की गई परीक्षाओं में प्रशासनिक, तकनीकी, चिकित्सा और न्यायिक क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इनमें उप समाहर्ता, औषधि निरीक्षक, सहायक प्राध्यापक, सहायक अभियंता, दंत चिकित्सक, सिविल जज, सहायक लोक अभियोजक और वन क्षेत्राधिकारी जैसे पदों की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी पॉलिटेक्निक और महिला पॉलिटेक्निक में व्याख्याता, सहायक वन संरक्षक, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी जैसे पदों की परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के वर्ष 2023, 2025 और बैकलॉग से जुड़े विज्ञापनों को भी इस फैसले में शामिल किया गया है।
पुरानी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में
सरकार का फैसला केवल हाल की भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। वर्ष 2014 से लेकर हाल के वर्षों तक आयोजित कई परीक्षाओं को भी रद्द किया गया है। इनमें पांचवीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती, वर्ष 2015 की सिविल जज भर्ती, मृदा संरक्षण पदाधिकारी, कृषि पदाधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और दंत चिकित्सक भर्ती जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। वर्ष 2017 की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, भू-विज्ञानी एवं रसायनज्ञ भर्ती और 2018 की सहायक लोक अभियोजक तथा सिविल जज भर्ती भी प्रभावित हुई है। वर्ष 2019 की संयुक्त सहायक अभियंता भर्ती और 2021 की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को भी रद्द किए जाने की सूची में रखा गया है।
संयुक्त स्नातक स्तर परीक्षा भी रद्द
सरकार ने इससे पहले झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तर परीक्षा को भी रद्द करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके माध्यम से जारी परिणामों को भी रद्द कर दिया गया है। सरकार के इस कदम का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जिन्होंने इन परीक्षाओं में भाग लिया था या नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे। अब संबंधित परीक्षाओं की आगे की प्रक्रिया नए निर्णयों और संशोधित व्यवस्था के आधार पर तय होगी।
छह परीक्षाएं फिलहाल स्थगित
सरकार ने छह भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द करने के बजाय अगले आदेश तक स्थगित किया है। इनमें खाद्य विश्लेषक, अभियोजन के उप निदेशक, परियोजना प्रबंधक एवं समकक्ष पद, कारखाना निरीक्षक, बॉयलर निरीक्षक और निदेशक पद की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। इन परीक्षाओं को लेकर आगे जांच और प्रशासनिक निर्णय के बाद स्थिति स्पष्ट की जाएगी। फिलहाल इनके संबंध में कोई नई परीक्षा तिथि घोषित नहीं की गई है।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समिति
सरकार ने केवल परीक्षाएं रद्द करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए उच्च न्यायालय से त्वरित सुनवाई वाली अदालत गठित करने का अनुरोध करने का निर्णय लिया गया है। दोनों आयोगों में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ बनाने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक समिति गठित करने की भी तैयारी है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित सुधार समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा कदम
भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद अब उन्हें लागू करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। 45 परीक्षाओं पर लिया गया फैसला इसी कड़ी का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शी और भरोसेमंद भर्ती व्यवस्था तैयार करने की है। परीक्षा रद्द होने के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य, दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर भी सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। छात्रों की नजर अब इस बात पर है कि नई व्यवस्था के तहत निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया कितनी जल्दी शुरू होती है।


