August 18, 2026

जेएसएससी-सीजीएल के 1975 चयनित कर्मियों पर संकट, नियुक्ति रद्द होने के अगले दिन सचिवालय में प्रवेश रोका

  • मुख्यमंत्री के आदेश के बाद प्रोजेक्ट भवन पहुंचे चयनित कर्मियों को गेट पर रोका गया, भारी बारिश के बीच प्रदर्शन जारी
  • बिना लिखित नोटिस नौकरी से हटाने का आरोप, सरकार से फैसले पर पुनर्विचार और स्पष्ट जवाब की मांग; सचिवालय में पुलिस बल तैनात

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा-2023 के माध्यम से चयनित 1975 कर्मियों की नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद मंगलवार को राजधानी रांची में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश जारी होने के अगले ही दिन चयनित कर्मी प्रोजेक्ट भवन पहुंचे, लेकिन उन्हें सचिवालय परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इसके बाद प्रभावित कर्मियों ने मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहे चयनित कर्मियों में उन युवाओं की संख्या अधिक है, जो अब तक सचिवालय में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, अंचल निरीक्षक और निम्नवर्गीय लिपिक जैसे पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सरकारी सेवा में शामिल किया गया था और वे नियमित रूप से अपने-अपने पदों पर काम कर रहे थे। अब एक आदेश के बाद उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में चयनित कर्मी प्रोजेक्ट भवन पहुंचे। लेकिन मुख्य प्रवेश द्वार पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कर्मी वहीं जमा हो गए और सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध जताने लगे। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी सचिवालय के बाहर डटे रहे। इससे प्रोजेक्ट भवन के आसपास कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें काम पर नहीं आने या सेवा समाप्त किए जाने के संबंध में कोई लिखित सूचना नहीं दी गई है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने उनकी नियुक्ति समाप्त करने का फैसला लिया है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण और लिखित आदेश उपलब्ध कराया जाना चाहिए। केवल मौखिक रूप से कार्यालय में प्रवेश रोकना उचित नहीं है। चयनित कर्मियों ने सरकार से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के सभी चरणों को पूरा करने के बाद नियुक्ति हासिल की थी। नियुक्ति के बाद वे सरकारी कार्यालयों में काम भी कर रहे थे। ऐसे में अचानक नौकरी खत्म किए जाने से उनके सामने रोजगार और भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा-2023 के माध्यम से कुल 1975 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। चयनित अभ्यर्थियों को राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अलग-अलग पदों पर नियुक्त किया गया था। इनमें सचिवालय से जुड़े कई महत्वपूर्ण पद भी शामिल थे। अब नियुक्ति रद्द करने के सरकारी आदेश के बाद इन सभी कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें बिना उचित सूचना और प्रक्रिया के सेवा से हटाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कोई कानूनी या प्रशासनिक समस्या है तो सरकार को उसका समाधान नियमों के तहत करना चाहिए। कर्मचारियों को अचानक कार्यालय में प्रवेश से रोकने के बजाय उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। वहीं, प्रदर्शन को देखते हुए प्रोजेक्ट भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को परिसर के भीतर प्रवेश करने से रोका। इसके बावजूद प्रभावित कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर गेट के बाहर प्रदर्शन करते रहे। नियुक्ति रद्द किए जाने के आदेश के बाद यह पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन सामने आया है। इससे सरकार के सामने चयनित कर्मियों की नाराजगी दूर करने की चुनौती भी पैदा हो गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से उन्हें स्पष्ट लिखित जानकारी नहीं दी जाती और उनके भविष्य को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनकी चिंता बनी रहेगी। फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन और पुलिस की तैनाती के कारण माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। चयनित कर्मी सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति रद्द करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह 1975 चयनित कर्मियों की सेवा और नियुक्ति से जुड़े विवाद को किस तरह सुलझाती है।

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