August 18, 2026

जीरो माइल के जाम पर पटना हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा संयुक्त हलफनामा

  • जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रस्तावित कदमों की जानकारी देने का दिया निर्देश
  • बड़े वाहनों की बेतरतीब पार्किंग और यातायात नियमों के उल्लंघन से बिगड़ रही व्यवस्था, मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को

पटना। राजधानी के जीरो माइल चौराहा पर प्रतिदिन लगने वाले भीषण जाम के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को संयुक्त हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से यह बताने को कहा है कि जीरो माइल क्षेत्र में लगातार बनी रहने वाली यातायात समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे कौन-कौन से प्रस्तावित उपाय किए जाने हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वीरेंद्र कुमार ने अदालत को बताया कि जीरो माइल चौराहा के पूर्वी छोर पर लगातार यातायात जाम की समस्या बनी रहती है। इसके कारण स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता एसडी संजय को मामले को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखने का निर्देश दिया। साथ ही संयुक्त हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है। हलफनामे में सरकार को यह जानकारी देनी होगी कि जीरो माइल चौराहा पर लगने वाले जाम की समस्या से निपटने के लिए कौन-कौन से कदम प्रस्तावित हैं। अदालत के इस निर्देश से उम्मीद जगी है कि लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान को लेकर संबंधित विभागों को ठोस कार्ययोजना तैयार करनी होगी। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि जीरो माइल चौराहा पर बड़े वाहनों की बेतरतीब आवाजाही और पार्किंग के कारण अक्सर गंभीर जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। यातायात नियमों का उल्लंघन भी समस्या को बढ़ाने वाला प्रमुख कारण बताया गया है। सड़क के किनारे या गलत स्थानों पर बड़े वाहनों के खड़े रहने से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो जाती है और वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जीरो माइल की यातायात समस्या को लेकर संबंधित वरीय अधिकारियों को पहले भी जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। समय बीतने के साथ जाम की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग रहा है, जबकि व्यस्त समय में स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष पटना शहर के अन्य इलाकों में भी यातायात अव्यवस्था का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि समस्या केवल जीरो माइल चौराहा तक सीमित नहीं है। पटना के कई प्रमुख मार्गों और चौराहों पर आए दिन जाम की स्थिति देखने को मिलती है। राजेंद्र नगर टर्मिनल के सामने लगने वाला जाम भी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बताया गया। याचिका में शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पहले किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार पटना में कई फ्लाईओवर बनाए गए, नई सड़कों का निर्माण हुआ और समय-समय पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किए गए। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में जाम की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। याचिकाकर्ता ने कहा कि पूर्व में पटना हाईकोर्ट की ओर से भी यातायात व्यवस्था सुधारने के संबंध में समय-समय पर निर्देश और सुझाव दिए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। याचिका में सड़कों की खराब स्थिति को भी यातायात समस्या से जोड़ा गया है। राजेंद्र नगर टर्मिनल के आसपास सड़क पर बने गड्ढों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहने की बात कही गई। इसके अलावा शहर के कई इलाकों में यातायात नियमों का पालन नहीं होने और सड़क किनारे वाहनों के अनियंत्रित तरीके से खड़े होने से जाम की स्थिति पैदा होने का उल्लेख किया गया है। जीरो माइल चौराहा पटना के प्रमुख प्रवेश मार्गों में शामिल है और यहां से बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन शहर के भीतर और बाहर आते-जाते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में लगने वाला जाम केवल स्थानीय लोगों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि पटना से दूसरे जिलों की ओर जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर भी असर डालता है। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार और संबंधित विभागों को यातायात समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित कदमों की जानकारी अदालत के समक्ष रखनी होगी। संयुक्त हलफनामे के माध्यम से यह स्पष्ट करना होगा कि जाम की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन की क्या योजना है और उसे किस तरह लागू किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे और उसमें बताए गए प्रस्तावित उपायों पर अदालत में आगे सुनवाई होने की संभावना है।

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