लाल किले के पास विस्फोट पर बड़ा खुलासा, संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में आतंकियों के बढ़ते नेटवर्क और तकनीकी इस्तेमाल पर चिंता
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच में अल-कायदा से जुड़े गुट के सदस्यों पर आरोप, मामले में अब तक 13 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा की गतिविधियों और एआई के इस्तेमाल का जिक्र, आतंकवादी संगठनों के बदलते तौर-तरीकों पर सुरक्षा एजेंसियों को चेतावनी
नई दिल्ली। नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट की जांच के बीच आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क और उनकी बदलती कार्यप्रणाली को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट ने गंभीर चिंता सामने रखी है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को लेकर सामने आए दावों में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिपोर्ट ने सीधे तौर पर लाल किले के विस्फोट को अल-कायदा की भारतीय उपमहाद्वीप शाखा द्वारा अंजाम दिए जाने की पुष्टि नहीं की है। रिपोर्ट में अल-कायदा की भारतीय उपमहाद्वीप शाखा की गतिविधियों, बाहरी अभियानों की आशंका और आतंकवादी संगठनों द्वारा नई तकनीक के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम की 4 फरवरी 2026 की रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-कायदा की भारतीय उपमहाद्वीप शाखा दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में सक्रिय बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार संगठन का ध्यान बाहरी अभियानों की ओर बढ़ रहा है। ऐसी गतिविधियों को इस तरह अंजाम दिए जाने की आशंका जताई गई है कि उनके पीछे संगठन की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी साबित करना कठिन हो। रिपोर्ट में इस नेटवर्क को लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा के स्तर पर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट में आतंकवादी संगठनों के बदलते तौर-तरीकों का भी उल्लेख किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठन साइबर क्षमताओं को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही वाणिज्यिक उपग्रह संचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। आतंकवादी संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रचार, कट्टरपंथी विचारों के प्रसार और लोगों को अपने साथ जोड़ने के प्रयासों में कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बेहतर हुए अनुवाद साधनों के जरिए आतंकवादी संगठन अलग-अलग भाषाओं में तेजी से अपना प्रचार पहुंचा रहे हैं। इससे उनका संदेश पहले की तुलना में अधिक व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति आतंकवाद से निपटने वाली एजेंसियों के लिए नई चुनौती पैदा कर रही है। लाल किले के पास हुए विस्फोट के मामले में भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच अलग दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी सामने ला चुकी है। एजेंसी ने मई 2026 में दाखिल आरोपपत्र में कहा था कि 10 नवंबर 2025 को लाल किले के इलाके में हुआ वाहन आधारित विस्फोट 11 लोगों की मौत का कारण बना था। जांच एजेंसी के अनुसार मामले के आरोपी अल-कायदा की भारतीय उपमहाद्वीप शाखा से जुड़े अंसार गजवत-उल-हिंद के गुट से संबंधित थे। मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी की विस्फोट में मौत हो गई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जून 2026 में मामले में तीन और आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। इनमें जम्मू-कश्मीर के जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और फरार आरोपी मुजफर अहमद शामिल हैं। इसके साथ ही मामले में आरोपपत्र का सामना करने वाले आरोपियों की संख्या 13 हो गई। जांच एजेंसी के अनुसार मुजफर अहमद चिकित्सक है और वह डॉ. अदील अहमद राथर का बड़ा भाई है। एजेंसी ने उसे अंसार गजवत-उल-हिंद के पुनर्गठित गुट का संस्थापक सदस्य और साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला आरोपी बताया है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र की उसी रिपोर्ट में लाल किले के हमले को लेकर एक सदस्य देश की सूचना का भी उल्लेख है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद को नई दिल्ली में हुए हमले से जोड़े जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि यह जानकारी सदस्य देशों से प्राप्त आकलनों का हिस्सा है। इसलिए इसे संयुक्त राष्ट्र की ओर से अंतिम जांच निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। लाल किले के पास हुआ विस्फोट और उसके बाद की जांच ने भारत में आतंकी नेटवर्क की संरचना, अंतरराज्यीय संपर्क और तकनीकी साधनों के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां रखी हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई से मामले में आरोपियों की संख्या लगातार बढ़ी है, जबकि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट दक्षिण एशिया में सक्रिय आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों और नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल पर व्यापक चेतावनी देती है। ऐसे में आने वाले समय में जांच एजेंसियों के लिए आतंकवादी नेटवर्क की पहचान के साथ-साथ उनके डिजिटल प्रचार तंत्र, तकनीकी संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा। लाल किला विस्फोट मामले में अंतिम जिम्मेदारी और सभी आरोपों का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगा।


