September 16, 2026

पीएम के जन्मदिन पर सरकारी ‘दीपोत्सव’!विक्रम में बीडीओ ने तय कर दिए 100 दीप और 200 मेहमान, दरभंगा में स्कूलों को 5 दीप जलाने का फरमान..बाढ़-सुखाड़ के बीच दीपों की गिनती!

पटना।बिहार में सरकारी मशीनरी अब सिर्फ सड़क, नाली, राशन और विकास योजनाओं की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी। जरूरत पड़ी तो दीप भी गिनाएगी और यह भी देखेगी कि दीप जलाने कितने लोग पहुंचे!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को लेकर बिहार सरकार ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित करने की आधिकारिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार 17 सितंबर को राज्य के जिलों से लेकर प्रखंड, पंचायत और बूथ स्तर तक दीपोत्सव कराने और अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने की योजना है।

लेकिन इसी सरकारी अभियान के क्रियान्वयन को लेकर पटना के विक्रम प्रखंड से जारी एक पत्र ने नई बहस छेड़ दी है।

दीप जलाइए… और गिनती भी बताइए!

विक्रम के प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय से 15 सितंबर 2026 को जारी पत्र में प्रखंड की आठ अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों पर दीपोत्सव कराने की व्यवस्था की गई है।

हर केंद्र के लिए लक्ष्य भी बाकायदा तय है—

100 दीप जलेंगे और 200 लोगों की भागीदारी होगी।

अब दीपक जलाना है तो जलाइए, लेकिन सरकारी हिसाब-किताब में यह भी दर्ज होगा कि दीप कितने जले और जनता कितनी जुटी!

प्रत्येक केंद्र की जिम्मेदारी संबंधित स्वच्छता पर्यवेक्षक को दी गई है, जबकि प्रखंड समन्वयक, विक्रम को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।

यानी प्रधानमंत्री के जन्मदिन की शाम दीपक भी सरकारी निगरानी में और मेहमानों की गिनती भी सरकारी निगरानी में!

और मामला सिर्फ बीडीओ कार्यालय की फाइल तक सीमित नहीं है। पत्र की प्रतिलिपि एसडीओ पालीगंज, उप विकास आयुक्त पटना और जिलाधिकारी पटना को भी भेजी गई है।

दरभंगा में भी स्कूलों में ‘पांच दीप’

अब आइए दरभंगा। यहां जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से जारी पत्र में जिले के तमाम प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों को 17 सितंबर की शाम 7 बजे विद्यालयों में पांच दीप जलाने का निर्देश दिया गया है।

इतना ही नहीं, कार्यक्रम के बाद फोटो और रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने की बात पत्र में कही गई है।

मतलब दीप जलेगा, फोटो खिंचेगी, रिपोर्ट बनेगी और फाइल भी चलेगी!

कल तक सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा की रिपोर्ट मांगी जाती थी, अब यह भी पता चलेगा कि किस स्कूल में पांच दीप पूरे जले या नहीं।

सरकारी अभियान या राजनीतिक कार्यक्रम का प्रशासनिक संस्करण?

यहां एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। प्रधानमंत्री का जन्मदिन अपने आप में कोई पारंपरिक राजकीय पर्व या राष्ट्रीय अवकाश नहीं है। लेकिन बिहार सरकार ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ को सरकारी स्तर पर आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें ‘आशीर्वाद का दीया’ भी आधिकारिक कार्यक्रम का हिस्सा है।

दूसरी तरफ भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी लोगों से 17 सितंबर की शाम अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की अपील की है।

यहीं से असली सवाल निकलता है—राजनीतिक दल अपील करे, नागरिक अपनी इच्छा से दीप जलाएं, यह अलग बात है। लेकिन सरकारी कर्मचारी और सरकारी संस्थान जब प्रशासनिक आदेश के जरिए इसमें शामिल हों तो इसे किस श्रेणी में रखा जाए?

विक्रम के पत्र में तो 100 दीप और 200 लोगों का लक्ष्य भी निर्धारित है।

बाढ़-सुखाड़ के बीच दीपों की गिनती!

बिहार में बाढ़, जलजमाव और दूसरी स्थानीय समस्याएं भी प्रशासन के सामने हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी मशीनरी की प्राथमिकताओं में राहत और जनसमस्याओं के साथ प्रधानमंत्री जन्मदिन का दीपोत्सव किस तरह और किस सीमा तक शामिल किया जाए।

बेशक सरकार इसे ‘सेवा संकल्प’ और जनभागीदारी का अभियान बता रही है। आधिकारिक कार्यक्रम में स्वच्छता, सेवा गतिविधियां और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जैसे दूसरे कार्यक्रम भी शामिल हैं।

लेकिन तस्वीर का व्यंग्यात्मक पहलू यही है—

प्रधानमंत्री का जन्मदिन है, इसलिए दीप जलाइए।

सरकार का अभियान है, इसलिए कर्मचारी लगाइए।

100 दीप जलाइए, 200 लोग बुलाइए।

और हां… फोटो लेना मत भूलिए, रिपोर्ट भी भेजनी है!

अब सवाल सिर्फ इतना है कि सरकारी तंत्र जनता की सेवा में दीप जला रहा है या दीप जलाने की व्यवस्था में जनता को लगा रहा है?

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