बंगाल की खाड़ी में कम दबाव से बदला बिहार का मौसम, 18 जिलों में बारिश-वज्रपात के आसार
- मानसून की सक्रियता से 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है तेज हवा, मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की दी सलाह
- पटना में धूप और उमस से बढ़ेगी परेशानी, राज्य में अब तक सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश; कई इलाकों में मौसम के उतार-चढ़ाव का दौर जारी
पटना। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र का असर बिहार के मौसम पर एक बार फिर दिखाई देने लगा है। मानसून की सक्रियता और समुद्र की ओर से आ रही नम हवाओं के कारण बुधवार को राज्य के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और वज्रपात की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के 18 जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवा चलने की भी संभावना है। मौसम में अचानक बदलाव को देखते हुए लोगों को वज्रपात से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भोजपुर, बक्सर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी जिले के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। बारिश के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। कुछ इलाकों में अचानक मौसम खराब होने और तेज गर्जना के साथ बिजली गिरने का खतरा बना रह सकता है। वज्रपात की आशंका को देखते हुए मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। बारिश और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, खेत या अन्य खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। पेड़ों के नीचे खड़े रहना भी जोखिम भरा हो सकता है। बिजली के खंभों, तारों और अन्य ऊंची संरचनाओं से दूरी बनाए रखना सुरक्षित रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और खेतों में काम करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। हालांकि राजधानी पटना और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है। यहां दिन के समय धूप निकल सकती है। धूप के साथ वातावरण में नमी अधिक रहने के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। पटना में स्थानीय स्तर पर बादल बनने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, लेकिन व्यापक बारिश की संभावना अन्य प्रभावित जिलों की तुलना में कम बताई जा रही है। बिहार में इस मानसून मौसम के दौरान अब तक बारिश की कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में राज्य में करीब 590 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक लगभग 373 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस तरह सामान्य बारिश के मुकाबले राज्य में करीब 35 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। बारिश की कमी का असर खेती और जल उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। ऐसे में मौसम में होने वाला हर बदलाव किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के पीछे बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के साथ मानसून की सक्रियता प्रमुख कारण है। समुद्र से आने वाली नमी के कारण वातावरण में आर्द्रता बढ़ रही है। इसके साथ ही मानसून की धुरी और स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियां बादल बनने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही हैं। यही वजह है कि राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश हो रही है, जबकि दूसरे इलाकों में तेज धूप और उमस बनी हुई है। दिन के समय सूर्य की गर्मी से धरती का तापमान बढ़ता है। इसके बाद वातावरण में मौजूद नमी के साथ स्थानीय स्तर पर ऊपर की ओर उठने वाली गर्म हवा की प्रक्रिया तेज होती है। इसे स्थानीय संवहन कहा जाता है। इससे कम समय में बादलों का निर्माण हो सकता है और कुछ क्षेत्रों में अचानक तेज बारिश या गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। यही कारण है कि एक जिले के किसी हिस्से में बारिश होने के बावजूद आसपास के क्षेत्र में केवल बादल, धूप और उमस देखने को मिलती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। विशेषकर बारिश और वज्रपात के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना सुरक्षित रहेगा। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आकाशीय बिजली के संकेत मिलने पर खुले स्थानों से तुरंत सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी जाती है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण बिहार में मानसून की गतिविधियां फिलहाल बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भी कुछ जिलों में बारिश और गरज-चमक की स्थिति देखने को मिल सकती है। राज्य में बारिश की कमी को देखते हुए यह वर्षा खेती के लिए राहत दे सकती है, लेकिन वज्रपात और तेज हवा के कारण सतर्कता बरतना भी उतना ही जरूरी होगा।


