पटना में घर-घर पहुंचेगा गंगा का पानी, 1500 करोड़ की परियोजना अंतिम चरण में, जल्द जारी होगा टेंडर
- कंगन घाट और दानापुर दियारा में बनेंगे 375-375 एमएलडी क्षमता के दो जल शोधन संयंत्र, 1200 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाने की तैयारी
- अमृत 2.0 योजना से नगर निगम के सभी 75 वार्ड जुड़ेंगे, 45 नई जल मीनारों के साथ 11 पुरानी जल मीनारें भी नई व्यवस्था से जोड़ी जाएंगी
पटना। राजधानी पटना में गंगा का पानी घर-घर पहुंचाने की बहुप्रतीक्षित योजना अब धरातल पर उतरने की दिशा में आगे बढ़ गई है। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम ने विस्तृत सर्वे पूरा करने के बाद गंगा जलापूर्ति परियोजना का प्रारूप तैयार कर लिया है। करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस बड़ी परियोजना को नगर विकास एवं आवास विभाग से मंजूरी मिल गई है। अब अगले महीने निविदा जारी करने की तैयारी है। परियोजना के पूरा होने के बाद पटना की मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था में व्यापक बदलाव आने की उम्मीद है। परियोजना के तहत शहर में गंगा के पानी को शोधन के बाद घरों तक पहुंचाने के लिए दो बड़े जल शोधन संयंत्र बनाए जाएंगे। पहला संयंत्र पटना सिटी क्षेत्र में कंगन घाट के पास प्रस्तावित है, जबकि दूसरा संयंत्र दानापुर दियारा क्षेत्र में बनाया जाएगा। दोनों संयंत्रों की क्षमता करीब 375-375 मिलियन लीटर प्रतिदिन होगी। इस तरह दोनों संयंत्र मिलकर प्रतिदिन करीब 750 मिलियन लीटर पानी के शोधन की क्षमता रखेंगे। गंगा से पूरे वर्ष पानी उठाने और उसे शोधन संयंत्रों तक पहुंचाने के लिए तीन जल संग्रहण टंकियों और जल ग्रहण केंद्रों का भी निर्माण किया जाएगा। यहां से गंगा का पानी उठाकर आवश्यक प्रक्रिया के बाद साफ किया जाएगा और फिर पाइपलाइन के माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाया जाएगा। इससे भूजल आधारित मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। अमृत 2.0 योजना के तहत पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों को इस परियोजना से जोड़ा जाएगा। घर-घर जलापूर्ति के लिए शहर में करीब 1200 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाने की योजना है। इसके अलावा विभिन्न इलाकों में 45 नई जल टंकियां और जल मीनारें बनाई जाएंगी। पहले से मौजूद 11 जल मीनारों को भी नई जलापूर्ति व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे शहर के बड़े हिस्से में जलापूर्ति का एकीकृत नेटवर्क तैयार होगा। परियोजना को केवल वर्तमान आबादी और पानी की जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किया गया है। इसे अगले 35 वर्षों की संभावित आबादी और जल मांग के आधार पर विकसित करने की योजना है। अनुमान के अनुसार वर्ष 2029 में पटना की आबादी करीब 23.81 लाख हो सकती है और उस समय शहर को प्रतिदिन करीब 406.259 मिलियन लीटर पानी की जरूरत होगी। वर्ष 2044 तक आबादी बढ़कर करीब 28.08 लाख और पानी की मांग 477.899 मिलियन लीटर प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। वर्ष 2059 तक पटना की आबादी 33.10 लाख से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। उस समय शहर की अनुमानित जल आवश्यकता करीब 561.830 मिलियन लीटर प्रतिदिन होगी। भविष्य की इसी जरूरत को देखते हुए जलापूर्ति प्रणाली की क्षमता तय की जा रही है। योजना में प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 155.25 लीटर पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।परियोजना के लिए पटना शहर में कुल 57 भूखंडों को चिह्नित किया गया है। बांकीपुर तथा पटना सिटी और पटना पूर्वी क्षेत्र में आवश्यक जलाशयों के लिए जमीन चिन्हित की जा चुकी है। कंकड़बाग क्षेत्र में प्रस्तावित आठ स्थानों में से सात स्थानों पर जमीन उपलब्ध हो गई है। वहीं पाटलिपुत्र क्षेत्र में 10 में से पांच स्थानों पर जमीन चिन्हित की जा चुकी है। शेष स्थानों पर जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। योजना के तहत गंगा के पानी को शोधन के बाद पाइपलाइन के माध्यम से सीधे शहर के घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था होगी। इससे पटना में जलापूर्ति का विस्तार होने के साथ भविष्य की बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। सरकार ने परियोजना को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यदि परियोजना तय समयसीमा के अनुसार पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में पटना की जलापूर्ति व्यवस्था का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। गंगा के पानी का शोधन कर उसे व्यवस्थित पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए लाखों लोगों तक पहुंचाने से शहर की दीर्घकालिक जल जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही बढ़ती आबादी के बीच सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।


