पूर्वी चंपारण में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के नाम पर वसूली का खुलासा, बीएलओ और साइबर कैफ़े संचालक गिरफ्तार
- प्रति व्यक्ति 200 रुपये लेने का आरोप, प्रशासनिक जांच में शिकायत सही मिलने के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
- निर्वाचन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पर प्रशासन सख्त, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की जांच तेज
मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। हरसिद्धि प्रखंड क्षेत्र में एक बूथ स्तरीय पदाधिकारी और एक साइबर केंद्र संचालक पर लोगों से पैसे लेकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आरोप लगा था। प्रशासनिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद दोनों आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और निर्वाचन तंत्र में हलचल मच गई है। जानकारी के अनुसार हरसिद्धि प्रखंड क्षेत्र से अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए लोगों से अवैध रूप से धन लिया जा रहा है। शिकायत में कहा गया था कि प्रत्येक व्यक्ति से नाम दर्ज कराने के बदले 200 रुपये की मांग की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अरेराज के भूमि सुधार उप समाहर्ता इति चतुर्वेदी ने हरसिद्धि प्रखंड विकास पदाधिकारी गुलशन कुमार को जांच का निर्देश दिया। प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में शिकायतों को सही पाया गया। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद हरसिद्धि थाना में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच के आधार पर बूथ संख्या 96 के बूथ स्तरीय पदाधिकारी मजीद बैंठा तथा साइबर केंद्र संचालक उपेंद्र कुमार को आरोपी बनाया गया। पुलिस के अनुसार मजीद बैंठा गोईठहा गांव के निवासी हैं और सरकारी विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। वहीं दूसरा आरोपी उपेंद्र कुमार माधोपुर गांव का निवासी है, जो सेवराहा बाजार में साइबर केंद्र संचालित करता है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण खुलासा यह भी हुआ कि साइबर केंद्र संचालक उपेंद्र कुमार बूथ स्तरीय पदाधिकारी की पहचान प्रणाली का उपयोग कर मतदाता सूची में नाम जोड़ने का कार्य कर रहा था। आरोप है कि इस प्रक्रिया के लिए लोगों से 200 रुपये लिए जाते थे और वसूली गई राशि दोनों आरोपियों के बीच बांट ली जाती थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ में साइबर केंद्र संचालक ने इस बात को स्वीकार भी किया है। पुलिस ने साइबर केंद्र की तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्राप्त साक्ष्य निर्वाचन विभाग के नियमों के उल्लंघन की ओर संकेत करते हैं। बरामद सामग्री की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध गतिविधि का दायरा कितना बड़ा था।प्रशासन अब यह भी पता लगाने में जुटा है कि इस प्रक्रिया के तहत अब तक कितने लोगों से पैसे लिए गए और कितने नाम नियमों के विपरीत तरीके से मतदाता सूची में जोड़े गए। अधिकारियों को आशंका है कि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही हो सकती है। इसी कारण मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। निर्वाचन विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव की आधारशिला होती है। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मतदाता सूची से संबंधित किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीर अपराध माना जाता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन कराने या अन्य निर्वाचन संबंधी सेवाओं के लिए किसी भी नागरिक से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और सरकारी व्यवस्था के तहत निःशुल्क संचालित की जाती है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की मांग करता है तो उसकी तत्काल सूचना प्रशासन को दें। हरसिद्धि थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और यदि इस प्रकरण में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। प्रशासन का कहना है कि चुनावी व्यवस्था में भ्रष्टाचार या अनियमितता के लिए किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


