पोखरे में डूबने से चौथी कक्षा के छात्र की मौत, डॉक्टर नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने किया सड़क जाम
- सारण के मशरक में दर्दनाक हादसे के बाद फूटा लोगों का गुस्सा, अस्पताल व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने का आरोप, कई घंटे तक बाधित रहा रामजानकी पथ
सारण। जिले के मशरक थाना क्षेत्र स्थित पचखंडा गांव में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। गांव के एक 11 वर्षीय छात्र की पोखरे में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश उस समय फूट पड़ा जब इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर वहां कोई सक्षम चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। गुस्साए ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-227ए रामजानकी पथ को जाम कर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मृतक छात्र की पहचान पचखंडा गांव निवासी मंटू शर्मा के पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई है। मनीष केंद्रीय विद्यालय मशरक में चौथी कक्षा का छात्र था। बताया जाता है कि रविवार को वह अपने दोस्तों के साथ गांव के पीछे स्थित चंवर क्षेत्र में खेलने गया था। इसी दौरान वह शौच के लिए पोखरे के पास पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शौच के बाद पानी लेने के दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। साथ में मौजूद बच्चों ने जब मनीष को डूबते देखा तो शोर मचाना शुरू कर दिया। बच्चों की आवाज सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चे को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक ले जाया गया, लेकिन वहां की स्थिति देखकर परिजन और ग्रामीण भड़क उठे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उस समय कोई एमबीबीएस चिकित्सक मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल में केवल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कार्यरत एक आयुष चिकित्सक की ड्यूटी थी, जबकि गंभीर मरीज के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत थी। लोगों का कहना था कि यदि समय पर योग्य चिकित्सक उपलब्ध रहते तो संभवतः बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी, लेकिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया। अस्पताल प्रभारी के मौके पर मौजूद नहीं रहने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल परिसर में जमा हो गए और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित लोगों ने बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग-227ए रामजानकी पथ को जाम कर दिया। सड़क जाम होने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप था कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बदहाल हो चुकी हैं और आम लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि कुछ महीने पहले सारण जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में चिकित्सकों की शिफ्टवार ड्यूटी तय की गई थी, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है। लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण लगातार मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। घटना की सूचना मिलने के बाद मशरक थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक बातचीत के बाद लोगों को कार्रवाई का भरोसा दिया गया, जिसके बाद सड़क जाम हटाया गया और यातायात सामान्य हो सका। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल छपरा भेज दिया है। प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुट गया है। वहीं गांव में इस हादसे के बाद मातम पसरा हुआ है। बताया जा रहा है कि मनीष अपने दो भाइयों में बड़ा था। बेटे की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस घटना से बेहद दुखी हैं और लगातार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में समय पर डॉक्टर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। फिलहाल प्रशासन ने मामले में जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी बनी हुई है।


