बिहार के 2552 हजयात्रियों का उड़ान कार्यक्रम जारी, 18 अप्रैल से शुरू होगी रवानगी
- आठ हवाई अड्डों से जाएगी पहली खेप, गया से इस बार नहीं होगी कोई उड़ान
- बदले अंतरराष्ट्रीय मार्ग से बढ़ेगा यात्रा समय, 40 से 42 दिनों का होगा हज सफर
पटना। बिहार से इस वर्ष हज यात्रा पर जाने वाले 2552 यात्रियों के लिए उड़ान कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। राज्य के हजयात्रियों की रवानगी 18 अप्रैल से शुरू होकर 21 मई तक विभिन्न चरणों में देश के आठ हवाई अड्डों से होगी। इस बार एक अहम बदलाव यह है कि गया हवाई अड्डे से कोई उड़ान निर्धारित नहीं की गई है, क्योंकि यहां से केवल 97 यात्रियों ने जाने का विकल्प चुना था। पहला जत्था 18 अप्रैल को रवाना होगा, जिसमें बिहार के 360 हजयात्री शामिल होंगे। ये यात्री कोलकाता, दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों से सऊदी अरब के लिए उड़ान भरेंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कोलकाता से सुबह 8 बजकर 20 मिनट, मुंबई से सुबह 6 बजकर 30 मिनट और दिल्ली से सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर विमान प्रस्थान करेगा। इस पहले जत्थे में पटना जिले के लगभग 100 यात्री शामिल हैं। रवानगी से पहले पटना स्थित हज भवन में सामूहिक दुआ का आयोजन किया जाएगा। हालांकि, राज्य में चल रही राजनीतिक गतिविधियों के कारण इस कार्यक्रम में किन-किन नेताओं की उपस्थिति होगी, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। उल्लेखनीय है कि पिछले दो दशकों से इस अवसर पर नीतीश कुमार की उपस्थिति देखी जाती रही है। यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, कुल 2552 यात्रियों में से 1698 हजयात्री पहले मदीना जाएंगे और उनकी वापसी जेद्दाह हवाई अड्डे से होगी। वहीं 854 यात्री पहले जेद्दाह जाएंगे और वापसी मदीना से करेंगे। हज यात्रा की कुल अवधि लगभग 40 से 42 दिनों की होगी। कार्यक्रम को दो चरणों में विभाजित किया गया है। 18 अप्रैल से 5 मई तक जाने वाले यात्री मदीना पहुंचेंगे, जबकि 6 मई से 20 मई तक के जत्थे जेद्दाह के लिए रवाना होंगे। इस प्रकार यात्रियों को व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग समूहों में भेजा जाएगा, जिससे व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें। इस वर्ष एक और विशेष स्थिति यह है कि बिहार राज्य हज समिति का गठन अब तक नहीं हो सका है। पिछले 11 महीनों से समिति के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित फाइल लंबित है। पिछले 20 वर्षों में यह पहला अवसर होगा जब बिना पूर्ण हज समिति के ही हज संचालन किया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि सभी हवाई अड्डों पर हज समिति के पदाधिकारी, कर्मचारी और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी मौजूद रहेंगे, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण इस बार हज यात्रियों की उड़ान मार्ग में भी बदलाव किया गया है। पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद रखने और पश्चिम एशिया में चल रहे तनावपूर्ण हालात के चलते विमानों को वैकल्पिक मार्ग से भेजा जाएगा। अब विमान पाकिस्तान के दक्षिणी हिस्से से होते हुए ओमान की खाड़ी के रास्ते आगे बढ़ेंगे और ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात के बीच से होकर मदीना या जेद्दाह पहुंचेंगे। पहले जब परिस्थितियां सामान्य थीं, तब विमान सीधे पाकिस्तान के ऊपर से गुजरते हुए संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते गंतव्य तक पहुंचते थे, जिसमें लगभग छह घंटे का समय लगता था। लेकिन नए मार्ग के कारण अब यात्रा अवधि बढ़कर लगभग सात से सवा सात घंटे हो जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और किसी भी स्थिति में विमान को युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इस वर्ष बिहार के हजयात्रियों के लिए विस्तृत और सुरक्षित व्यवस्था की गई है। हालांकि कुछ व्यवस्थागत चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर देखने को मिल रहा है, फिर भी प्रशासन यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तत्पर है।


