गोविंद हत्याकांड: कोर्ट में पेशी के दौरान जान का खतरा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी रंजय ओंकार, बाबुल चौधरी और सौरभ की पेशी
मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित गोविंद हत्याकांड में एक नया मोड़ सामने आया है। मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपियों—रंजय ओंकार, शातिर अपराधी बाबुल चौधरी और सौरभ उपाध्याय उर्फ बाला ने कोर्ट में सशरीर पेश होने पर अपनी जान का खतरा बताया है। आरोपियों की इस सुरक्षा चिंता को देखते हुए अदालत ने अब उन्हें बड़ी राहत देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए पेशी की अनुमति दे दी है।
जेल अधीक्षक को सौंपा आवेदन, कोर्ट ने दी मंजूरी
जेल में बंद रंजय ओंकार, बाबुल चौधरी और सौरभ उपाध्याय ने जेल अधीक्षक को एक लिखित आवेदन सौंपा था। तीनों आरोपियों ने अलग-अलग लिखे पत्रों में स्पष्ट तौर पर कहा है कि जेल से बाहर अदालत ले जाए जाने के दौरान उन पर जानलेवा हमला हो सकता है और उनकी जान को गंभीर खतरा है। आरोपियों से पत्र मिलने के बाद जेल अधीक्षक ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) को पूरे मामले की जानकारी दी। जेल अधीक्षक के आग्रह और सुरक्षा कारणों की समीक्षा करने के बाद अदालत ने जेल प्रशासन को तीनों आरोपियों की उपस्थिति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से कराने की इजाजत दे दी है।
यह था पूरा मामला
गौरतलब है कि बीती 31 मई की रात अमर सिनेमा रोड स्थित अष्टकोन टावर में शातिर अपराधी गोविंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद मृतक गोविंद की पत्नी के बयान पर रंजय ओंकार, बाबुल चौधरी, सौरभ उपाध्याय और पटना के एक डॉक्टर के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्या के मुख्य आरोपी ओंकार, शूटर बाबुल और वारदात के लिए किराए पर फ्लैट की व्यवस्था करने वाले सौरभ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
रिमांड में भी नहीं खुला असली ‘मास्टरमाइंड’ का नाम
नगर पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए मुख्य आरोपी बाबुल चौधरी और सौरभ उपाध्याय को 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर लेने की अर्जी दी थी, जिस पर अदालत ने 48 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर की थी। हालांकि, पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस 48 घंटे की कड़ी पूछताछ में भी पुलिस के हाथ कोई बड़ा सुराग नहीं लगा है। पुलिस दोनों से यह उगलवाना चाहती थी कि इस पूरी हत्या के पीछे असली साजिशकर्ता (मास्टरमाइंड) कौन है, वारदात में इस्तेमाल हथियार कहां छिपाए गए हैं और भागने के लिए किस वाहन का इस्तेमाल हुआ था। लेकिन दोनों आरोपियों ने रिमांड अवधि के दौरान पुलिस को लगातार गोलमोल जवाब देकर भटकाया। पुलिस का मानना है कि दोनों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत सवालों के जवाब दिए हैं, जिससे मुख्य साजिशकर्ता का नाम अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
मनीष, वैभव और शूटर राजा सिंह की तलाश में छापेमारी
पूछताछ में पुलिस के सामने तीन नए नाम—मनीष, वैभव और शूटर राजा सिंह आए हैं। पुलिस का मानना है कि इन तीनों के बारे में आरोपियों ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है और जो पते बताए गए हैं, वे भी ठोस नहीं हैं। राजा सिंह के बारे में बताया जा रहा है कि वह साहबगंज इलाके का रहने वाला है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस छानबीन कर रही है। वहीं, मनीष और वैभव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
जब्त मोबाइल खंगाल रही पुलिस, मृतक की पत्नी से भी होगी पूछताछ
हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोनों को जब्त कर लिया है और उनकी सीडीआर (Call Detail Record) खंगाली जा रही है। हालांकि, अब तक कोई ठोस डिजिटल सबूत हाथ नहीं लगा है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अब गोविंद की पत्नी से भी दोबारा गहन पूछताछ की तैयारी की जा रही है, ताकि हत्या की असली वजह और कड़ियों को जोड़ा जा सके। वारदात में इस्तेमाल हथियार और वाहन की बरामदगी पुलिस के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।


