पटना में एसटीईटी अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, टीआरई-4 से पहले परीक्षा कराने की मांग, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

पटना। पटना में एक बार फिर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उबाल देखने को मिल रहा है। इस बार यह विरोध प्रदर्शन एसटीईटी परीक्षा को लेकर हो रहा है। अभ्यर्थी पटना कॉलेज से अपने आंदोलन की शुरुआत कर रहे हैं। इस विरोध मार्च का लक्ष्य डाक बंगला चौराहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक सरकार एसटीईटी परीक्षा टीआरई-4 से पहले आयोजित करने की घोषणा नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सरकारी घोषणा और छात्रों में निराशा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर बताया कि टीआरई-4 परीक्षा 2025 में और टीआरई-5 परीक्षा 2026 में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एसटीईटी परीक्षा टीआरई-5 से पहले कराई जाएगी, यानी 2026 में ही। इस घोषणा से उन सभी छात्रों को गहरा झटका लगा है, जो 2024 में एसटीईटी की परीक्षा देकर 2025 की टीआरई-4 परीक्षा में भाग लेने की तैयारी कर रहे थे।
बीएड और बीटीसी प्रशिक्षु छात्रों पर असर
एसटीईटी परीक्षा देरी से होने की स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान उन बीएड और बीटीसी प्रशिक्षु छात्रों को होगा जो 2022-2024 और 2023-2025 सत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ये छात्र यदि एसटीईटी पास नहीं करते, तो वे टीआरई-4 परीक्षा में भाग ही नहीं ले सकेंगे। चूंकि एसटीईटी परीक्षा ही शिक्षक बनने की पहली पात्रता है, इसलिए इन प्रशिक्षुओं का भविष्य अधर में लटक सकता है।
विश्वासघात महसूस कर रहे छात्र
छात्रों का कहना है कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने पहले यह घोषणा की थी कि एसटीईटी अब साल में दो बार आयोजित की जाएगी। इसी भरोसे उन्होंने तैयारी शुरू की थी। लेकिन अब जब सरकार कह रही है कि अगली एसटीईटी परीक्षा 2026 में होगी, तो उन्हें धोखा महसूस हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है।
एसटीईटी की महत्ता और प्रक्रिया
एसटीईटी (राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा) बिहार में सरकारी स्कूलों में माध्यमिक (कक्षा 9-10) और उच्च माध्यमिक (कक्षा 11-12) स्तर पर शिक्षक बनने की अनिवार्य पात्रता परीक्षा है। इस परीक्षा का आयोजन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति करती है। जो भी अभ्यर्थी शिक्षक बनना चाहता है, उसे इस परीक्षा को पास करना जरूरी होता है। बिना एसटीईटी पास किए बीपीएससी द्वारा आयोजित टीआरई परीक्षा में भाग नहीं लिया जा सकता।
शिक्षा प्रणाली पर पड़ने वाला प्रभाव
एसटीईटी केवल नौकरी के लिए पात्रता प्रमाणपत्र नहीं है, बल्कि यह यह सुनिश्चित करता है कि शिक्षक बनने वाला व्यक्ति उस विषय में दक्ष हो और उसमें शिक्षण क्षमता हो। इस परीक्षा के माध्यम से यह तय होता है कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक योग्य हैं या नहीं। इसमें गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू आदि विषयों के लिए अलग-अलग पेपर होते हैं। उच्च माध्यमिक के लिए संबंधित विषय में स्नातकोत्तर के साथ बीएड भी आवश्यक होता है। एसटीईटी परीक्षा को लेकर सरकार और अभ्यर्थियों के बीच गहरी असहमति सामने आई है। एक ओर सरकार इसे 2026 में आयोजित करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों छात्र इसे टीआरई-4 से पहले कराने की मांग पर अड़े हैं। यदि सरकार समय पर फैसला नहीं लेती, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

You may have missed