August 13, 2026

पंजाब भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल पर बगावत, 120 से अधिक नेताओं ने छोड़े पद, चुनाव से पहले घमासान

  • छह जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद बढ़ी नाराजगी, होशियारपुर में 111 पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा
  • दिल्ली आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को तलब कर विवाद जल्द सुलझाने के दिए निर्देश, वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने की रणनीति

चंडीगढ़। पंजाब भाजपा में हालिया संगठनात्मक फेरबदल पार्टी के लिए परेशानी का कारण बन गया है। नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद कई जिलों में पुराने और वरिष्ठ नेताओं के बीच नाराजगी खुलकर सामने आई है। स्थिति इस कदर बिगड़ी कि अब तक 120 से अधिक नेता और पदाधिकारी अपने संगठनात्मक पदों से सामूहिक इस्तीफा दे चुके हैं। बढ़ते असंतोष को देखते हुए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मामले में सीधे हस्तक्षेप किया है। प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को दिल्ली बुलाकर संगठन के भीतर पैदा हुए विवाद को जल्द नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता फिलहाल नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोबारा संगठन से जोड़ना है। होशियारपुर, लुधियाना, फरीदकोट, खन्ना, मुक्तसर और संगरूर जैसे जिलों में विरोध को शांत करना सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में ऐसा संकट पैदा न हो, जिसका असर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर पड़े। प्रदेश नेतृत्व को वरिष्ठ नेताओं से लगातार संवाद करने और सभी पक्षों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए हैं। संगठन में असंतोष की सबसे बड़ी तस्वीर होशियारपुर में दिखाई दी है। यहां जिला अध्यक्ष पद पर बदलाव को लेकर भाजपा के पुराने नेताओं ने विरोध दर्ज कराया है। सतीश बावा को हटाकर नितिन गुप्ता ‘नन्नू’ को जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी बढ़ी। पंजाब के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता तीक्ष्ण सूद ने संगठन में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके समर्थन में होशियारपुर के 111 स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी सामूहिक इस्तीफा दिया। इनमें मंडल अध्यक्ष, जिला सचिव और विभिन्न मोर्चों से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं। फरीदकोट में भी जिला अध्यक्ष बदले जाने के विरोध में मंडल अध्यक्ष समेत करीब 10 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संगठनात्मक पद छोड़ दिए। लुधियाना, खन्ना और संगरूर समेत अन्य जिलों में भी पुराने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। पार्टी से लंबे समय से जुड़े नेताओं का आरोप है कि संगठन में उनकी उपेक्षा की जा रही है और दूसरे दलों से भाजपा में शामिल हुए नए चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। पुराने नेताओं की नाराजगी का एक कारण प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को भी माना जा रहा है। पार्टी के कुछ टकसाली नेताओं का कहना है कि पहले कांग्रेस से भाजपा में आए केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई और अब संगठनात्मक नियुक्तियों में भी दूसरे दलों से आए नेताओं को महत्व मिल रहा है। इससे वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे नेताओं में असंतोष पैदा हुआ है। इसके अलावा महज दो सप्ताह के भीतर छह जिला अध्यक्षों को बदलने के फैसले ने भी संगठन के भीतर सवाल खड़े किए हैं। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इतने तेजी से किए गए बदलावों से स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच असमंजस पैदा हुआ। दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तलब किए जाने के बाद केवल सिंह ढिल्लों ने विवाद को पार्टी का आंतरिक मामला बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा है। उनका कहना है कि जो नेता नाराज हैं, उन्हें पूरा सम्मान दिया जाएगा और बातचीत के जरिए उनकी शिकायतें दूर की जाएंगी। अब भाजपा नेतृत्व की कोशिश है कि इस्तीफा देने वाले नेताओं को दोबारा संगठन से जोड़ा जाए। साथ ही, भविष्य की नियुक्तियों में वरिष्ठ नेताओं से व्यापक सलाह-मशविरा करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व मानता है कि समय रहते असंतोष को दूर कर संगठन को एकजुट रखना 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए बेहद जरूरी है।

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