राबड़ी आवास विवाद गहराया, सुरक्षा में बदलाव और बंगला खाली करने के नोटिस पर तेज हुई सियासत

  • लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की जेड प्लस सुरक्षा समाप्त, नई विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू
  • 15 दिन में सरकारी आवास खाली करने का अल्टीमेटम, सरकार और राजद के बीच बयानबाजी तेज

पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवास खाली करने के लिए सरकार की ओर से दिए गए नोटिस के बीच लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। इन दोनों घटनाक्रमों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा समाप्त कर दी है। अब दोनों को बिहार पुलिस की विशेष सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की गई है। नई व्यवस्था के तहत उन्हें बुलेट प्रूफ वाहन, एस्कॉर्ट वाहन तथा आठ से सोलह सुरक्षा कर्मियों की तैनाती उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की वाई श्रेणी की सुरक्षा भी समाप्त कर दी गई है और अब उन्हें केवल एक अंगरक्षक उपलब्ध कराया गया है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, उनकी पत्नी राजश्री और सांसद मीसा भारती की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेजस्वी यादव को पहले की तरह वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। उनके सुरक्षा घेरे में विशेष सशस्त्र पुलिस बल के गृह रक्षक, जिला पुलिस बल के अंगरक्षक तथा एस्कॉर्ट दल शामिल रहेंगे। वहीं मीसा भारती को पूर्ववत तीन अंगरक्षक उपलब्ध रहेंगे और राजश्री यादव को एक महिला अंगरक्षक की सुविधा जारी रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ-साथ 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को लेकर विवाद भी लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने लालू परिवार को यह आवास खाली करने के लिए 15 दिनों का अंतिम नोटिस जारी किया है। भवन निर्माण विभाग के अनुसार यह आवास अब पशुपालन, मत्स्य एवं डेयरी मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है। विभाग का कहना है कि राबड़ी देवी को नवंबर 2025 में ही 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पुराना आवास खाली नहीं किया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लालू परिवार वर्ष 2005 से 10 सर्कुलर रोड स्थित इस सरकारी आवास में रह रहा है। पिछले छह महीनों के दौरान कई बार आग्रह किए जाने के बावजूद परिवार ने नए आवास में स्थानांतरण नहीं किया। इसके बाद सरकार ने औपचारिक रूप से नोटिस जारी करते हुए आवास खाली करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। नोटिस मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकार के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी कीमत पर 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती है तो बल प्रयोग कर उन्हें वहां से हटाए, लेकिन वे स्वेच्छा से आवास नहीं छोड़ेंगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकारी आवास किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होता और न ही किसी की बपौती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमों के अनुसार आवंटित आवास खाली करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक पद पर रहने वाले लोगों को सरकारी संपत्ति के प्रति जवाबदेही और मर्यादा का पालन करना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक सरकारी आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। एक ओर सरकार नियमों के पालन की बात कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कार्रवाई बता रहा है। सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और आवास विवाद के एक साथ सामने आने से यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है। फिलहाल सबकी नजरें अगले 15 दिनों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लालू परिवार सरकार के नोटिस पर क्या कदम उठाता है और प्रशासन इस मामले को किस दिशा में आगे बढ़ाता है। बिहार की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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